बिलासपुर| ब्रह्माकुमारी प्रभु दर्शन भवन, टिकरापारा में गुरुवार को सभी साधकों को ध्यान कराया गया। कार्यक्रम के दौरान बीके मंजू ने कहा कि नई सृष्टि के लिए नया संस्कार धारण करना भी आवश्यक है। पुराने समय में वैभवों और साधनों का सुख अल्पकालिक होता है। इससे मुक्त होने में पुराने संस्कार बाधक होते हैं। परमात्मा नई सतयुगी सृष्टि की स्थापना का कार्य कर रहे हैं। एक परमात्मा की याद से पुराने संस्कार और पुराने संसार का आकर्षण समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन के लिए संकल्पों में दृढ़ता आवश्यक है। प्रतिज्ञा और कर्म में अगर समानता नहीं है, तो प्रतिज्ञा बोझ बनकर रह जाएगी। संकल्प में भी किसी भी विकार की कमजोरी, व्यर्थ बोल, व्यर्थ भावना, घृणा और ईर्ष्या की भावना पाप के खाते को बढ़ाती है। अतः राजयोग के अभ्यास से पुण्य का खाता बढ़ाओ। अंत में सभी ने परमात्मा की याद में भोग ग्रहण किया।


