भास्कर न्यूज | इटखोरी धुना पंचायत मोगला गांव के क़ालीन देवी का पुराना जर्जर खपरैल कच्चा मकान पूरी तरह से गिर गया है। कुछ बच्चे मकान के हिस्से में वह रहकर दिन काट रही है। उनके पति विजय सिंह भी एक छोटा किसान हैं। गरीबी के कारण वे अपना मकान नहीं बना पा रहे हैं। कालीन देवी ने बताई की हमें सरकार द्वारा संचालित सरकारी योजनाओं का कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। जिसके कारण घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। मेरी सिर्फ तीन बेटियां हैं। जबकि एक छोटा बेटा भी है। हम लोग सभी परिवार फिलहाल टूटे-फूटे घर में रहकर गुजर बसर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजसू प्रखंड अध्यक्ष बिरजू राणा के पहल पर शनिवार को धुना पंचायत में आयोजित सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में पहुंचकर स्थानीय बीडीओ को वास्तु स्थिति से अवगत कराकर आवास के लिए आवेदन दी हूं। भास्कर न्यूज | चतरा रविवार को क्षेत्र ख्रीस्त राजा पर्व के उल्लास और आस्था से सराबोर रहा। संत तेरेसा चर्च परिसर में ईसाई धर्मावलंबियों ने विशेष प्रार्थना सभा एवं पूजा-अर्चना कर पर्व की शुरुआत की। इसके बाद श्रद्धापूर्ण माहौल में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो संत तेरेसा चर्च से निकलकर नाजरेथ विद्या निकेतन तक पहुंची। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु पूरे मार्ग में ख्रीस्त हमारा राजा है, ख्रीस्त राजा की जय जैसे जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर रहे थे। शोभायात्रा में सजावटी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें प्रभु यीशु के जीवन, प्रेम, क्षमा और शांति के संदेशों का जीवंत प्रस्तुतीकरण किया गया था।नाजरेथ विद्या निकेतन और चर्च परिसर में प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ, जहां फादर नाबौर कुजूर एवं फादर तिलेसफोर बाड़ा ने ख्रीस्त राजा की जीवनी और उनके आध्यात्मिक संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। फादर नाबौर कुजूर ने कहा, प्रभु यीशु आध्यात्मिक राजा हैं। उन्होंने अपने वचनों से प्रेम, क्षमा और त्याग का संदेश दिया। वे शांति के राजकुमार हैं और पूरी दुनिया के आध्यात्मिक राजा माने जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ख्रीस्त राजा पर्व दरअसल प्रभु यीशु के सम्मान और उनकी शिक्षाओं को हृदय से स्वीकार करने का प्रतीक है। हम सभी उनके अनुयायी हैं और समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश फैलाना हमारा कर्तव्य है। इस अवसर पर चतरा जिला मुख्यालय के अलावा मर्दनपुर, संघरी, लरकुआ, शिवराजपुर, जरही समेत कई गांवों से बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलंबी शामिल हुए। स्कूली बच्चों की सहभागिता ने शोभायात्रा को और भी आकर्षक और जीवंत बना दिया।आस्था, सज्जा, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ संपन्न हुई यह शोभायात्रा स्थानीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी रही।


