भास्कर न्यूज | जामताड़ा पीएम श्री आदर्श मध्य विद्यालय की कक्षा 4 का कमरा आईसीटी लैब। समय दोपहर के लगभग 2 बजे। विद्यार्थी अपना रिजल्ट जानने को उत्सुक हैं। तभी प्रोजेक्टर चलाया जाता है। उस पर कक्षा के टॉप-10 विद्यार्थियों की सूची दिखाई जाती है। इसमें भी सिर्फ विद्यार्थियों के नाम हैं। किस विषय में किसे कितने अंक मिले, इसकी कोई जानकारी नहीं। बस शिक्षिका ने कह दिया-सभी बच्चे पास हैं। और… हो गया रिजल्ट। बच्चों को छुट्टी दे दी गई। यही स्थिति अन्य सरकारी विद्यालयों की भी रही। इस संबंध में पीएम श्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय पट्टाजोरी की प्रभारी अनिमेष मंडल ने बताया कि विभाग की तरफ से सादा रिपोर्ट कार्ड नहीं मिला है। हर कक्षा के टॉप-10 बच्चों को कागज में उन्हें मिले प्राप्तांक लिखकर दे दिया गया है। शेष को स्क्रीन पर परिणाम दिखाया गया है। दरअसल, इस बार जिले के प्रारंभिक स्कूलों में कक्षा 1 से 7 तक की वार्षिक परीक्षा को मजाक बना दिया गया। पहले तो परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र ही नहीं दिए गए। शिक्षकों ने ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे और परीक्षार्थियों ने उसी के अनुसार उत्तर दिए। रिजल्ट का समय आया, तो स्कूलों को रिपोर्ट कार्ड ही उपलब्ध नहीं कराया गया। 20% स्कूलों में सादे कागज पर लिख दिए अंक शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों को मार्च तक रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया था। लेकिन इसके लिए स्कूलों को रिपोर्ट कार्ड नहीं दिया, जिसमें विषयवार अंक अंकित किए जाते हैं। इसकी जगह एक सॉफ्ट कॉपी भेजते हुए प्रिंटआउट निकाल कर रिजल्ट देने की बात कही गई। हालांकि जिले के25% मध्य विद्यालयों ने बृहस्पतिवार को भी रिजल्ट नहीं दिया। जबकि मध्य विद्यालय बागडेहरी सहित कुछ स्कूलों में पिछले साल के खाली रिपोर्ट कार्ड बचे थे। ऐसे में बच्चों को रिपोर्ट कार्ड में रिजल्ट दिया गया। 20% स्कूलों में सादे कागज पर अंक प्रिंट कर रिजल्ट के रूप में दिए गए। स्कूल प्रबंधन अपने फंड से छपवा सकते हैं रिपोर्ट कार्ड जामताड़ा के डीएसई विकेश कुणाल प्रजापति ने कहा कि मूल्यांकन हुआ है और छात्र-छात्राओं को उनके विषयवार अंक बता दिए गए हैं। प्रिंटेड रिपोर्ट कार्ड के लिए स्कूल प्रबंधन अपने फंड में जमा राशि का उपयोग कर सकते हैं। राज्य के सभी स्कूलों की रिपोर्ट ली जाएगी। दो परीक्षाओं में न प्रश्नपत्र मिले, न उत्तरपुस्तिका जिले में 599 प्रारंभिक स्कूल हैं। उनमें कक्षा 1 से 7 में 1.12 लाख छात्र छात्राएं हैं। 22 जून से स्कूलों में प्रोजेक्ट रेल शुरू हुआ था। इसके तहत हर शनिवार को यानी कुल 38 परीक्षाएं ली गई। 32 दिनों में हुई परीक्षाओं में कक्षा 1 से 7 तक की पहले एफए वन, एफए टू, एफए थी और फिर एफए फोर की परीक्षा हुई। उसके बाद अर्धवार्षिक और फिर वार्षिक परीक्षा ली गई। अर्धवार्षिक, वार्षिक समेत किसी परीक्षा में बच्चों को प्रश्नपत्र नहीं दिए गए। उत्तरपुस्तिका भी घर से लेकर आने को कहा गया। शिक्षकों ने बोर्ड पर प्रश्न लिखे। उन्हें कॉपी में उतारकर बच्चों ने उनके उत्तर लिखे।


