पर्यावरणीय प्रदूषण का मामला:करणी औद्योगिक क्षेत्र में फैले प्रदूषित पानी का निस्तारण अब सरकारी निगरानी में होगा

करणी औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रदूषण के मामले में एनजीटी ने अपने आदेश को सही ठहराते हुए रीको की ओर से दायर रिव्यू पिटिशन को खारिज कर दिया है। इसे देखते हुए अब सरकार ने राज्य स्तरीय पर्यावरण निगरानी एवं प्रत्युत्तर समिति गठित की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने 6 नवंबर 2025 को ताहिर हुसैन बनाम जिला कलेक्टर एवं अन्य में आदेश पारित कर करणी औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित कई तरह के निर्देश जारी किए थे। इनमें पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का अनुपालन, वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करना, सीईटीपी (सामूहिक अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र) का निर्माण एवं संचालन, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली तथा संस्थागत निगरानी तंत्र शामिल हैं। रीको ने इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दायर की थी, लेकिन एनजीटी ने अपने आदेश को वैध ठहराते हुए रिव्यू पिटिशन को खारिज कर दिया है। एनजीटी के आदेश से रीको को बड़ा झटका लगा है। एनजीटी ने प्रदूषित जल का निस्तारण करने के लिए छह माह का समय दिया था। तीन महीने बीत चुके हैं। अब राज्य सरकार भी इसे लेकर गंभीर हुई है। इस पूरे मामले को देखने के लिए मानक प्रारूप में एकल स्थायी राज्य स्तरीय पर्यावरण निगरानी एवं प्रत्युत्तर समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर को भी एक जिला स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। उस समिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, रीको, भूजल विभाग और औद्योगिक संघ के प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा। भास्कर एनालिसिस : एनजीटी के फैसले का निष्कर्ष राज्य स्तरीय समिति में कौन?
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति में उद्योग विभाग के आयुक्त, रीको एमडी, केंद्रीय भूजल बोर्ड के वैज्ञानिक शशांक प्रताप सिंह सदस्य तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव को शामिल किया गया है। रीको पर दंडात्मक कार्यवाही की तैयारी करणी औद्योगिक क्षेत्र फर्स्ट फेज में 66 बीघा में फैले प्रदूषित पानी का निस्तारण नहीं करने पर रीको के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रीको के सीनियर मैनेजर को इस संबंध में कड़ा पत्र लिखा है। रीको से कहा गया है कि यदि समय रहते उसने एनओसी नहीं ली तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली सहित दंडात्मक प्रावधान लागू करते हुए ब्याज सहित वसूली करेंगे। समिति क्या करेगी

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