जयपुर में वन एवं पर्यावरण संरक्षण मंत्री संजय शर्मा ने कहा- पर्यावरण से ही जीवन संभव है। उन्होंने प्रधानमंत्री के आह्वान “एक पेड़ मां के नाम” का जिक्र करते हुए विद्यार्थियों से अपील की कि वे न केवल पेड़ लगाएं, बल्कि पर्यावरण को हरित बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा- विज्ञान की प्रगति का अंतिम लक्ष्य मानव जाति का हित होना चाहिए। रामबाग सर्किल स्थित एस.एस. जैन सुबोध स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरुवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि मंत्री संजय शर्मा ने शुभारंभ किया। “इन्टरफेस बिट्वीन साइन्स, सोसायटी एंड एनवायरमेंट: टुवर्ड्स इनक्लुजिव एंड सस्टेनेबल डवलपमेंट” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने विज्ञान, समाज और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन अनिवार्य कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के सचिव वी. सरवन कुमार ने कहा- हमें विकास लक्ष्यों को पर्यावरण के अनुकूल बनाना होगा। वहीं विशिष्ट अतिथि पवन कुमार उपाध्याय (प्रिन्सिपल चीफ कंजर्वेशन ऑफ फॉरेस्ट) ने अरावली पर्वतमाला और वन्यजीव संरक्षण की कहा- पौधों को लगाने के साथ उनकी पेड़ बनने तक देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। मुख्य वक्ता और विशेषज्ञों के विचार गौहर रज़ा ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच के बारीक अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा- विज्ञान ज्ञान का अर्जन है, जबकि प्रौद्योगिकी हमारी क्षमता विस्तार है। वहीं भुवनेश माथुर ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से ‘क्लीन एण्ड ग्रीन टेक्नोलॉजी’ और बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की जानकारी दी।


