पशुओं के इलाज के लिए आने वाले लोगों को लौटना पड़ता है बैरंग, न विटामिन की दवा है न सिरप न टैबलेट

भास्कर न्यूज | पबिया नारायणपुर प्रखंड के पबिया स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में दवाइयों की भारी कमी से ग्रामीणों और पशुपालकों को गंभीर परेशानी हो रही है। यह अस्पताल वर्षों से आसपास के गांवों के लिए एकमात्र पशु चिकित्सा केंद्र रहा है। अब यहां जरूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। चिकित्सालय पहुंचे मैनैजर मंडल ने बताया कि उनकी गाय गर्भवती है। उसे विटामिन की दवा, सिरप और टैबलेट की जरूरत है। लेकिन अस्पताल में कुछ भी उपलब्ध नहीं है। कर्मचारियों ने बताया कि फिलहाल केवल कीड़े मारने की दवा ही मौजूद है। दवा लेने पहुंचे आनंद मुर्मू, धर्मेंद्र मोहली समेत कई ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब भी गाय या बकरी के इलाज के लिए आते हैं, तो हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। यह स्थिति अब चिंता का कारण बन गई है। पशु ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। दवाई लेने अस्पताल पहुंचे पशुपालक । पशुपालन विकास योजना सिर्फ कागजों तक सीमित- स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में दवाइयों की आपूर्ति नियमित नहीं हो रही है। सरकार की पशुपालन विकास योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। अस्पताल के बोर्ड पर विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई है, लेकिन जमीन पर कोई सुविधा नहीं मिल रही। ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग इस पर तुरंत ध्यान दें। दवाइयों की पर्याप्त आपूर्ति हो। चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। दवाओं के भंडारण की पारदर्शी व्यवस्था बने। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो पशुओं की देखभाल प्रभावित होगी। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। क्या कहते हैं पशुपालन विभाग के अधिकारी पशुपालन विभ्बाग के एएचओ डॉ सुनील सिंह ने कहा कि अस्पताल में दवाइयों की दवाई कमी है जिस वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। जरूरत के अनुसार दवाइयों के लिए मार्च में ही ऑर्डर किया गया है। जल्द ही अस्पताल में दवाई उपलब्ध हो जाएगा। जिसके बाद सभी जरूरतमंद पशुपालकों को उपलब्ध कराया जाएगा।

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