प्रदेश में सबसे पहले अनार की खेती के रूप में नवाचार देने वाले भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में अब यह खेती महज 150 हेक्टेयर में सीमित हो गई है। दूसरी ओर पश्चिमी राजस्थान के किसान इसके प्रति काफी जागरूक हो रहे हैं। जहां प्रदेश भर में अनार की खेती का रकबा अब 17165 हेक्टेयर पहुंच चुका है। इनमें से 15 हजार हेक्टेयर एरिया तो बाड़मेर, जालोर और जोधपुर जिले में ही है। बाकी दो हजार के करीब हेक्टेयर में प्रदेश के अन्य जिले के किसान अनार की खेती कर रहे हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में 156844 टन अनार उत्पादन हो रहा है। इससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है। इसमें सफल वही किसान हो रहे हैं, जो आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। साथ ही टिश्यू कल्चर वाले पौधे काम में ले रहे हैं। दरअसल, अनार की सबसे अधिक पैदावार महाराष्ट्र में होती है। सबसे पहले पौधे वहां से ही लाए गए। ऐसे में पौध के साथ रोग भी पहुंचा। इस रोग नियंत्रण में यहां के किसान सफल नहीं हो पाए। ऐसे में भीलवाड़ा–चितौड़ सहित शुरुआत में यह खेती अपनाने वाले जिलों के किसानों का रुझान कम हो गया। मगर अब टिश्यू कल्चर पौध से रोग नियंत्रण आसान हो गया है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक यहां के किसानों को भी दोबारा अनार की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे बैक्टीरियल ब्लाइट और रूट नॉट नेमाटोड की समस्या से निजात दिला रहे हैं।


