पहचान की दौड़ : रोज बन रहे 416 मूल निवास और जाति प्रमाण-पत्र

भास्कर संवाददाता | पाली जिले में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है। हजारों लोग ई-मित्र केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। 2002 की मतदाता सूची में नाम या रिकॉर्ड नहीं मिलने से ड्राफ्ट लिस्ट से नाम कटे लोगों को अब अपनी नागरिकता और पहचान साबित करनी पड़ रही है। इसी वजह से पिछले सवा दो महीनों में प्रमाण पत्रों के आवेदनों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 1 नवंबर 2025 से 9 जनवरी तक जिले में मूल निवास के 14,866 और जाति प्रमाण पत्र के 14,277 आवेदन आए। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में मूल निवास के लिए 6,803 और जाति प्रमाण पत्र के लिए 9,026 आवेदन ही हुए थे। इस अवधि में रोज औसतन 416 लोग पहचान से जुड़े दस्तावेज बनवाने ई-मित्र केंद्र पहुंच रहे हैं। जाति प्रमाण पत्र में सबसे ज्यादा आवेदन ओबीसी (स्टेट) वर्ग से आए हैं। कुल आवेदनों में से 44 प्रतिशत, यानी 6,309 आवेदन अकेले ओबीसी वर्ग के हैं। प्रदेश में 4 नवंबर से एसआईआर प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। जिनके दस्तावेज पूरे नहीं थे, उन्हें नाम कटने की चेतावनी दी गई। इसके बाद लोगों ने एहतियातन मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र बनवाने शुरू कर दिए। प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत 4 नवंबर से हुई। 16 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची जारी हुई। नाम कटे मतदाताओं को 15 जनवरी तक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दियाहै। नाम दोबारा जुड़वाने के लिए मांगे 13 दस्तावेजों में ये दोनों प्रमाण पत्र सबसे आसान माने जा रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा आवेदन कर रहे हैं। इनके पास शैक्षणिक दस्तावेज नहीं हैं या जो 10वीं से कम पढ़े-लिखे हैं। पहले जहां प्रमाण-पत्र बनने में 7 से 10 दिन लगते थे, वहीं 4 से 5 दिन में बन रहे हैं।

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