एक्सपर्ट के ताय मारकर रिपोर्टर खालिद अतर खान और अजय देवांगन की रिपोर्ट रायपुर से विशाखापट्टनम तक 464 किमी लंबे 6 लेन एक्सप्रेस वे पर बासनवाही पहाड़ी में टनल बन रही है। इसे बनाने वाली हैदराबाद की कंपनी के कर्मचारियों के मुताबिक आने और जाने की दोनों टनल की कुल लंबाई 5.80 किमी है। जिसमें अबतक कुल 3.6 किमी को खुदाई हो चुकी है। अगस्त 2025 तक रायपुर से विशाखापट्टनम जाने वाले मार्ग की टनाल की खुदाई पूरी हो जाएगी। मार्च 2020 तक यह पूरी हो जाएगी। जून 2026 तक दूसरी टनल भी कंप्लीट हो जाएगी। जनवरी 2027 में यह टनल आम लोगों के लिए खोल दी जाएगी। ट्विन टनल में एक टनल की कुल चौड़ाई 15 मीटर होगी। जिसमें 11.5 मीटर का 3 लेन का कैरेज वे होगा। टनल की ऊंचाई 3.5 मीटर होगी। सावधानीः बायोमेट्रिक से जांच हो रही ताकि अंदर जाने व बाहर आने वाला एक ही कर्मचारी हो टनल में खुदाई के लिए सुरक्षा सबसे जरूपी है। पहाड़ के नीचे रॉक के अलावा सेंड पैक भी है। रोज 6 मीटर के एक ब्लॉक की खुदाई होती है। जिसे ब्लास्ट करने के लिए 3 सौ किलो बारूद का इस्तेमाल होता है। इसके बाद पत्थरों को सैंड रॉक मशीन से बाहर निकाला जाता है। हर दिन कुछ कुछ घंटे में टनल के अंदर पहाड़ों की जांच करनी पड़ती है। जहां तक खुदाई हो चुकी है, वहां तक हर 15 मीटर की दूरी में टारगेट्स मशीन लगाई गई हैं। ताकि अगर पहाड़ी एक मिमी भी नीचे धंसेगी तो पता चल जाएगा। खुदाई के साथ साथ टनल में रॉक बोल्ट लगाए जा रहे हैं। जिस पर कांक्रीट से किया गया है। यहां गैंट्री केन लगाई गई जा रही है। टनल में काम करने एक बार में इंजीनियर व टेक्निशियन समेत 20 से 25 कर्मचारी ही अंदर जाते हैं। ये ये कर्मचारी होते हैं जिन्हें उस दिन के लिए कंपनी अनुमति देती है। जब ये टनल के मुहाने में पहुंच बायोमेट्रिक्स मशीन में अंगूठा लगाते हैं। मशीन उन्हीं कर्मचारियों को एक्सेप्ट करती है जिनकी अनुमति होती है। अन्य कर्मचारियों के अंगूला लगाने पर उन्हें रिजेक्ट कर देती है। जो कर्मचारी अंदर जाते उनका पूरा ब्योरा लेकर रवाना किया जाता व वापसी में फिर से बायोमेट्रिक में अंगूठा लगवाया जाता। ताकि सही कर्मचारी की पहचान हो कि जो अंदर गया, वही बाहर आया है। अंदर ऑक्सीजन और तापमान कंट्रोल पर भी फोकस खुदई के दौरान पहाड़ी से तरह-तरह की गैस निकलती है जो खतरनाक व जानलेवा भी हो सकती है। जिसके लिए खुदर्श स्थल से बाहर तक डक्ट सिस्टम बनाया गया है। जिससे गैस तो बाहर आती ही है, साथ ही अंदर का तापमान भी सामान्य बना रहता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जारी इस प्रोजेक्ट की सुरक्षा ऐसी कि बिना अनुमति फोटो बाहर नहीं आ सकती भास्कर की टीम ट्विन टनल के निर्माण को देखने के लिए निकली। इस दौरान रास्ते के बीच की निर्माणाधीन सड़कों से तो जाने दिया गया, लेकिन ट्विन टनल के एक किमी पहले ही प्रोजेक्ट के कर्मचारियों ने टीम को रोक लिया। इंचार्ज से स्वीकृति लेने पर भी ड्यूटी में तैनात कर्मचारी ने कुछ भी मानने से इंकार कर दिया। फोन पर भी बात करने से इंकार कर दिया। नक्सल क्षेत्र में काम के दौरान संभवतः उन्हें यही हिदायत दी गई हो। टीम को फिर से सिक्योरिटी चेक पॉइंट भेजा गया। जहां उनकी पूरी जांच हुई। जब ऊपर से स्वीकृति मिलने का कंफर्मेशन उन्हें मिल गया उन्हें सुरक्षा जैकेट व हेलमेट पहनाया गया। इसके बाद वे टीम को अपनी गाड़ी में साथ लेकर टनल के मुहाने पर पहुंचे। वहां पहुंचकर एक बार फिर भास्कर टीम की जांच हुई। बायोमेट्रिक व रजिस्टर में ब्योरा दर्ज किया गया। भास्कर टीम के साथ ही खुद सुरक्षा इंचार्ज के मोबाइल भी वहां जमा कराए गए। ताकि अंदर की कोई फोटो बाहर न आए। टीम को चिप लगा हुआ विजिटिंग कार्ड देने के बाद अधिकारियों के साथ टनल के अंदर भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया से साफ है कि यहां कितनी सुरक्षा बरती जा रही है।


