भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा बस्तर संभाग ही नहीं, बल्कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में पहली बार घुटने की टीबी से पीड़ित मरीज का सफल कॉम्प्लेक्स नी रिप्लेसमेंट किया गया। यह सर्जरी न केवल चिकित्सा दृष्टि से जटिल थी, बल्कि संसाधन सीमाओं के बीच सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता और प्रतिबद्धता का भी उदाहरण बना। जानकारी के अनुसार 31 वर्षीय महिला मरीज पिछले एक वर्ष से घुटने की टीबी से पीड़ित थी। बीमारी की गंभीरता इतनी बढ़ चुकी थी कि मरीज पूरी तरह से चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थी। लगातार दर्द, सूजन और संक्रमण के कारण उसका सामान्य जीवन कष्टमय हो चुका था। चिकित्सकों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उपचार को दो चरणों में योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से पूरा करने का निर्णय लिया। प्रथम चरण में गीदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी कर घुटने से मवाद तथा संक्रमित और क्षतिग्रस्त हड्डी को पूरी तरह साफ किया गया। हड्डी में बने दोष को सीमेंट और वायर की सहायता से अस्थायी रूप से स्थिर किया गया, ताकि संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा सके। मवाद की जांच रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि होने के बाद मरीज को 9 माह तक पूर्ण टीबी का उपचार दिया गया। क्षय रोग खत्म होने के बाद किया आपरेशन: हड्डी का क्षय रोग पूरी तरह समाप्त हो चुका है, तब विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पूरी तैयारी और सावधानी के साथ कॉम्प्लेक्स नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सिविल सर्जन डॉक्टर अभय तोमर ने कहा मरीज का ऑपरेशन किया गया है तीन दिन आब्जर्वेशन में रखेंगे, एंटीबायोटिक और दूसरी दवाएं दी जा रही हैं। घुटने की टीबी, टीबी का एक हड्डी एवं जोड़ से संबंधित रूप है, जिसे मेडिकल भाषा में ऑस्टियो आर्टिकुलर टीबी कहा जाता है। इसमें टीबी के जीवाणु घुटने के जोड़ को संक्रमित कर देते हैं, जिससे दर्द, सूजन, जकड़न और धीरे-धीरे जोड़ की संरचना नष्ट होने लगती है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज चलने-फिरने में असमर्थ हो सकता है। इसका उपचार लंबी अवधि तक चलता है, जिसमें लंबी अवधि की टीबी दवाएं और गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। समय पर पहचान और नियमित इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।


