पहले 1 किसान करता था पोरो कमेली में लीची की खेती अब 27 कर रहे

जिले में 3 हजार से अधिक किसानों को सौर सिंचाई पंप की सुविधा दी गई है, पर इनमें से महज 1 हजार किसान ही इसका सही इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जिले के भांसी ग्राम पंचायत के बंगाली कैंप में प्राकृतिक जल से 27 एकड़ में किसान मौसमी साग-भाजी के साथ-साथ लीची और आम की भी पैदावार कर हर साल प्रत्येक किसान डेढ़ से 2 लाख की आमदनी कमा रहा है। भांसी में 27 किसानों को एक-एक एकड़ जमीन सरकार की तरफ से 50 साल पहले मिली थी। इसी जमीन में किसान खेती कर रहे हैं, 27 एकड़ में कहीं भी सोलर सिस्टम या बोर नहीं है। जिले में बांसी ही एक ऐसी जगह है जहां 12 महीने किसान खेती करते हैं, धान के सीजन में धान तो साल भर मौसमी सब्जी और आम, लीची की भी पैदावार अब करने लगे हैं। बचेली, किरंदुल, दंतेवाड़ा सहित आसपास के हाट-बाजारों में यहां की सब्जी पहुंचती है। यहां भांसी के पहाड़ों के प्राकृतिक जल स्रोत का इस्तेमाल किया जा रहा है, पहाड़ से पाइप लाइन के माध्यम से और फिर खेतों तक छोटी नहर बनाकर किसान अपने-अपने खेतों तक पानी ले जाते हैं। यहां 24 घंटे 12 महीना पानी खेतों तक पहुंचता है, भीषण गर्मी में भी किसान इसी प्रकृतिक जल स्रोत से सिंचाई का लाभ ले रहे हैं।
किसानों को खेतों तक पानी ले जाने की व्यवस्था के लिए शासन द्वारा पाइप लाइन बनाकर दिया गया था। टंकी तक पानी पाइप लाइन से पहुंचता है, फिर यहां बनाई गई टंकी से 27 एकड़ में किसान नालियों के माध्यम से अपने खेतों तक पानी ले जाते हैं, यहां खेतों में पक्की नाली बनाई है। बांसी क्षेत्र में पहले सिर्फ 1 किसान लीची की खेती करता था, पोर्रोकमेली के भीमा को लोग क्षेत्र में लीची के नाम से जानते थे, अब बांसी क्षेत्र में बड़ी तादाद में लीची की पैदावार की जा रही है। किसान तारक, बिलको सरकार, अनिल पाल, सुदामा मंडल जैसे किसान खेती कर रहे हैं। किसानों ने बताया इस साल पैदावार लीची की कम हुई थी, पर आम की पैदावार हुई है, बांसी क्षेत्र का लीची अब पूरे जिले के हाट बाजारों में मिलता है।

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