सावन महीने की पहली सोमवारी पर रांची स्थित ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह की पहली किरण के साथ ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर की ओर बढ़ चलीं। भोलेनाथ के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। हर साल की तरह इस बार भी यह दिन शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व का रहा। सुबह से ही उमड़ी भक्तों की भीड़ मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार सुबह 4 बजे से ही मंदिर की 468 सीढ़ियों पर श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सिर पर जल, दूध, बेलपत्र और फूलों की थाली लिए श्रद्धालु ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष करते हुए ऊपर चढ़ रहे थे। हर कदम पर उनकी आस्था और भक्ति झलक रही थी। इस दौरान अरघा के माध्यम से जल चढ़ाया जा रहा। भक्ति में लीन रहा रांची का माहौल रांची का पहाड़ी मंदिर न केवल शहर का धार्मिक केंद्र है, बल्कि सावन के इस पावन अवसर पर यह आस्था का प्रमुख स्थल बन जाता है। श्रद्धालुओं का कहना था कि सावन सिर्फ पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और भगवान से जुड़ाव का महीना है। मंदिर परिसर और आसपास का इलाका पूरे दिन भक्ति और अध्यात्म से सराबोर रहा। प्रशासन ने संभाली व्यवस्था की कमान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस बल, होमगार्ड और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। सीढ़ियों के दोनों ओर बैरिकेडिंग, जगह-जगह जलपान केंद्र, प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा और CCTV कैमरों की मदद से भीड़ को नियंत्रित किया गया। पूजा-अर्चना के साथ हुआ विशेष आयोजन पहली सोमवारी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। सामूहिक रुद्रपाठ और हवन में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आए भक्तों ने भी भाग लिया। कई श्रद्धालु मंदिर परिसर में ध्यान और भजन-कीर्तन में लीन नजर आए। आस्था और सौहार्द का संगम रांची के पहाड़ी मंदिर में आज का दिन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक सौहार्द का उदाहरण भी बना। भक्तों की एकता, अनुशासन और सहयोग ने इस आयोजन को सफल और भव्य बना दिया। सावन की पहली सोमवारी पर रांची ने एक बार फिर आस्था की मिसाल पेश की।


