गिरिडीह जिले के बगोदर स्थित ऐतिहासिक हरिहरधाम मंदिर में सावन मास की पहली सोमवारी पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। अलसुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। जैसे ही सुबह पांच बजे मंदिर के पट खुले, भक्तों का जनसैलाब भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़ा। हर तरफ ओम नमः शिवाय, बोल बम और हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्तों की भक्ति और शिव आराधना से सराबोर हो गया। जागृत महादेव के रूप में होती है पूजा हरिहरधाम मंदिर न केवल बगोदर का प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि यह स्थान पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां तपस्वियों और ऋषियों ने शिव साधना की थी। यहां स्थापित शिवलिंग को जागृत महादेव के रूप में पूजा जाता है। यह विश्वास है कि सावन की सोमवारी पर यहां की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। हरिहरधाम की पहचान वर्ष 1988 में पश्चिम बंगाल निवासी साधु अमरनाथ मुखोपाध्याय द्वारा स्थापित 65 फीट ऊंचे शिवलिंग से है। यह भव्य शिवलिंग दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। हर सोमवारी को यहां हजारों भक्त भगवान शिव की एक झलक पाने आते हैं। झारखंड ही नहीं बिहार और बंगाल से भी पहुंचते हैं भक्त सावन मास भगवान शिव को समर्पित होता है। इसमें सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भगवान शिव भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसी आस्था के चलते इस बार भी गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो सहित बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से कांवड़ यात्रा कर भक्त यहां पहुंचे। मंदिर परिसर मेले जैसा नजारा पेश कर रहा। जगह-जगह पूजन सामग्री, प्रसाद और भोजन की दुकानों के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था की गई थी। भक्तों ने गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, आक, भांग और फूल अर्पित किए। चट मांगनी पट ब्याह की भी है मान्यता हरिहरधाम की एक विशेष मान्यता चट मांगनी पट ब्याह के रूप में प्रसिद्ध है। यहां अविवाहित युवक-युवतियां सच्चे मन से पूजा कर विवाह का वरदान मांगते हैं। इसलिए हर सोमवारी को यहां बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। बगोदर थाना पुलिस के साथ महिला पुलिस बल और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश देने और व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।


