भास्कर न्यूज | बालोद शुगर मिल करकाभाट में 22 से 26 दिसंबर तक 5 दिन में 4 हजार 620 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है। जिससे एक हजार 680 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ है। रिकवरी रेट 8.76% है। प्रबंधन के अनुसार शुक्रवार को 700 टन गन्ने की पेराई से 1010 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ। रिकवरी रेट 8.90% रहा। गुरुवार तक 670 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ था। दावा किया जा रहा है कि पेराई के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध है। इस वजह से ब्रेकडाउन की स्थिति नहीं बनेगी। हालांकि बाद में गन्ने की कमी से ऐसी स्थिति बन सकती है। प्रबंधन के अनुसार इस सीजन पेराई के लिए 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना पहुंचने का अनुमान है। जिले के 5 ब्लॉक से 40 हजार टन गन्ना पहुंचने का अनुमान है। वहीं धमतरी, कांकेर, दुर्ग, बेमेतरा, रायपुर सहित अन्य जिले से 25 हजार टन गन्ना पहुंच सकता है। वर्तमान में बालोद के अलावा दूसरे जिले के किसानों को भी टोकन जारी किया जा रहा है ताकि पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकें। एमडी राजंेद्र राठिया, जीएम एलके देवांगन ने बताया कि शनिवार को भी सुबह से शाम तक पेराई जारी रही। ऐसे में पेराई व उत्पादन आंकड़ा बढ़ते क्रम पर रहेगा। जनवरी में रिकवरी रेट बढ़ने की उम्मीद प्रबंधन के अनुसार जब पेराई की शुरुआत होती है, तब रिकवरी रेट 8 से 9 प्रतिशत के आसपास रहता है। ऐसा पिछले कई सीजन में हो चुका है। जनवरी से रिकवरी रेट में एक प्रतिशत या इससे ज्यादा का इजाफा हो सकता है। प्रबंधन भी स्वीकार कर रही है कि जिले में गन्ने की कमी है। इस वजह से दूसरे जिले के किसानों को भी टोकन जारी कर रहे हैं, ताकि पेराई लगातार चलती रहे। 5 हजार से ज्यादा टन गन्ने की खरीदी हो चुकी है। रोजाना बालोद के अलावा दूसरे जिले के किसान ट्रैक्टर, ट्रक व अन्य गाड़ियों से गन्ना बेचने पहुंच रहे हैं। जिले में 911 हे. में गन्ने की खेती हो रही कृषि विभाग के अनुसार जिले के 5 ब्लॉक में 911 हेक्टेयर रकबे में लगी गन्ने की कटाई होगी। 1300 हेक्टेयर रकबे में गन्ना लगाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन एक हजार से कम हेक्टेयर में गन्ना लगा है। गन्ना लगाने हर साल लक्ष्य तय किया जाता है लेकिन पूर्ति नहीं हो पाती। जिले में कुल 5 ब्लॉक है। वर्तमान मंे एक भी ब्लॉक में लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। यह स्थिति, तब है, जब कृषि विभाग की ओर से किसानों को गन्ना लगाने प्रोत्साहित करने का दावा किया जा रहा है। पिछले साल 2100 हे. में गन्ना लगाने का लक्ष्य रखा गया था।


