जल जीवन मिशन (जेजेएम) में हर महीने 1.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन होने पर ही प्रदेश के हर घर तक नल से जल पहुंच सकेगा। केंद्र सरकार की ओर से बजट में जेजेएम की समय सीमा 2028 तक बढ़ाने के बाद भी प्रदेश में जलदाय विभाग की चुनौतियां कम नहीं हुई है। प्रदेश में पिछले पांच साल में 56 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक ही नल लग पाया है, जबकि 10 प्रतिशत घरों में योजना से पहले ही नल कनेक्शन थे। ऐसे में जेजेएम से पिछले पांच साल में केवल 46 प्रतिशत घरों में कनेक्शन हुए है, जबकि अब तीन साल में 44 प्रतिशत यानि शेष 47 लाख घरों में पानी कनेक्शन करना होगा। जबकि वर्तमान में कई टेंडर व वर्कऑर्डर कोर्ट केस व विवादों में अटके हुए है। जेजेएम के टेंडरों की जांच ईडी, सीबीआई, एसीबी कर रही है। ऐसे में जेजेएम की गति बढ़ाना चुनौती है। जेजेएम को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ए. सावंत और मिशन के प्रबंध निदेशक कमर उल जमान चौधरी पर है। 8 आईएएस बदले, 3 साल में सिर्फ एक रैंक सुधरी
सरकार ने जेजेएम की मॉनिटरिंग के लिए विभाग में तीन साल में 8 आईएएस बदले, लेकिन जेजेएम की केवल एक ही रैंकिंग का सुधार हो पाया है। अब 32 से 31 वें पायदान पर आ पाया है। केंद्र सरकार ने 15 अगस्त 2019 को देश में गांवों के हर घर तक नल के जरिए पानी पहुंचाने के लिए जेजेएम की घोषणा की। मिशन के शुरु से ही राजस्थान पिछड़ा रहा। राज्य को मार्च 2024 तक एक करोड़ 7 लाख 77 हजार 074 कनेक्शन करने थे। लेकिन पिछली सरकार में रफ्तार धीमी रही। प्रदेश में जेजेएम पर करीब 93 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे है। अब तक करीब 31 हजार करोड़ के काम ही हुए है। इसमें 25400 करोड़ रुपए का पेमेंट हुआ है। जेजेएम के टेंडरों, वर्कऑर्डर व माप पुस्तिका (एमबी) और पेमेंट में करोड़ों रुपए के घोटालों के आरोपों के बाद भी जलदाय विभाग ने जिम्मेदार इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई नहीं की है। एसीबी में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपियों को सस्पेंड करने के बजाए राजनीतिक दबाव में प्राइम फील्ड पोस्टिंग दे दी।


