बस संचालक की मनमानी:जयपुर से रोज 22 शहरों के लिए जाती है 200 स्लीपर बसें, किराया एसी का लेते हैं, सफर नॉन एसी का करा रहे

यात्रियों की सुविधा के लिए राजधानी से रोज 22 शहरों के लिए 200 से अधिक एसी स्लीपर बसों का संचालन हो रहा है। इनमें सफर करने वाले यात्रियों को एसी का किराया देने के बाद भी नॉन एसी में सफर करना पड़ रहा है। जयपुर से लखनऊ एसी स्लीपर बस का किराया ₹1000 से ₹1500 के बीच में होता है। वहीं, नॉन एसी स्लीपर बस का किराया 800 से ₹1200 के बीच में होता है। अगर A/C बस 5 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देती है तो नॉन एसी बस 6 किलोमीटर प्रति लीटर का। एसी बसों में गर्मियों में जिस प्रकार एसी चलता है, उसी प्रकार सर्दियों में गर्म हीटर चलना चाहिए, लेकिन बस संचालक हीटर का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इस वजह से यात्री पूरे सफर में सर्दी की वजह से परेशान हो रहे हैं। बसों में हीटर नहीं चलाने की वजह से माइलेज में बढ़ोतरी करना है। इसके चलते बस ऑपरेटर्स एसी का किराया लेने के बाद नॉन एसी में यात्रियों को ले जा रहे हैं। जगतपुरा गेटोर निवासी तुषार शर्मा ने 5 जनवरी को जयपुर से लखनऊ के लिए एसी स्लीपर बस की बुकिंग की। इसका पीएनआर 277221 है। बस संख्या आरजे 06 पीए 8001 रात 10.25 बजे जयपुर से रवाना हुई। एसी बस होने की वजह से सुनील कुमार सर्दी के लिए कंबल भी नहीं लेकर गए। एसी का टिकिट होने के बावजूद भी बस में गर्म हीटर पूरी रात नहीं चलाया। ड्राइवर से शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। सिद्वार्थ नगर निवासी सुनील कुमार किसी काम के लिए आगरा गए थे। आगरा से जयपुर के लिए 6 जनवरी को रात 11 बजे बस संख्या एआर01पी7499 से रवाना हुआ। बस का एसी स्लीपर का टिकिट कराया। बस में चढ़े तो एसी बंद था। गर्म हीटर पर नहीं चलाया गया। इस वजह से पूरी रात बस में सर्दी मरते रहे। बस का टैक्स 31 दिसंबर 2024 तक का ही जमा हुआ था। टीपी भी 26 सितंबर 24 तक ही मान्य है। समाधान शहर में चल रही बसों को नियमित रूप से परमिट, टैक्स, इंश्योरेंस, फिटनेस सहित अन्य जांच होनी चाहिए। अवैध बसों पर आरटीओ उड़न दस्तों की ओर से पंजीयन और परमिट निरस्त करने की कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही किराया निर्धारण के लिए विभाग को कमेटी का गठन करके रोडवेज की तरह स्लैब बनाना चाहिए। कमेटी की ओर से निर्धारित किराया ही बस और ट्रेवल एजेंट को लेना चाहिए। आदेशों की पालना नहीं करने पर कार्रवाई की जाए। कान्ट्रैक्ट कैरिज परमिट बसें उठा रही बस स्टैंड से यात्री एसी स्लीपर में चलने वाली अधिकतर बसें कान्ट्रैक्ट कैरिज परमिट की है। इनका किराया निर्धारित करने का काेई प्रावधान नहीं है। कान्ट्रैक्ट कैरिज की बसें बस स्टैंड से यात्रियों काे नहीं ले सकती। ये बसें समूह के रूप में एक जगह से दूसरी जगह यात्रियों काे ले-जा सकती हैं, लेकिन बस वालाें ने विभाग काे राजस्व चपत लगाने के लिए गली निकाल रखी है। यात्रियों की बुकिंग ट्रेवल एजेंट के माध्यम से की जाती है। ट्रेवल एजेंट काे बसें बस ऑपरेटर्स उपलब्ध कराते हैं। स्लीपर बसाें से पाेलाेवैक्ट्री पर जाम रहता है ट्रैफिक स्लीपर बसाें की वजह से रात 9 से 11 बजे तक पाेलाेवैक्ट्री के आसपास ट्रैफिक जाम की स्थिति रहती है। अधिकतर स्लीपर बसें इस जगह से संचालित हाेती हैं। इसके पास में सिंधी कैंप बस स्टैंड भी है, जहां से रोडवेज बसें संचालित हाेती है। कलेक्टर की ओर से 01 मार्च, 2006 को जारी अधिसूचना के तहत चांदपोल से रेलवे स्टेशन, गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे से चांदपोल एवं वनस्थली मार्ग पर प्राइवेट बसों की नो एंट्री है। बिना टैक्स-परमिट के चल रही हैं बसें, नहीं हाे रही जांच राजधानी से 22 शहराें के लिए हर दिन करीब 200 स्लीपर एसी बसें दाैड़ रही हैं। इसमें से अधिकतर बसें बिना परमिट, फिटनेस, इंश्योरेंस और टैक्स चुकाए बिगर चल रही है। इसके बावजूद भी आरटीओ उड़न दस्तों की ओर से जांच नहीं की जा रही है। इसमें से अधिकतर बसें रात 9 से 11 बजे के बीच में रवाना हाेती है। इस दाैरान विभाग के दस्तों की ड्यूटी की अदला-बदली हाेती है। इसी समय अवैध बसाें का संचालन हाेता है।

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