पाकिस्तान में संपत्ति बेचकर छत्तीसगढ़ रहने आए हिंदू:सरकार से गुजारिश- वापस न भेजा जाए, गृहमंत्री विजय शर्मा बोले- विचार करेंगे

छत्तीसगढ़ में हाल ही में 24 लोगों का एक ग्रुप सिंध पाकिस्तान से रायपुर पहुंचा है। जिन्होंने खुद को हिंदू बताया है। ये लोग ऐसे समय में राजधानी आए हैं जब देशभर में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का विरोध हो रहा है और केंद्र सरकार ने पाकिस्तानियों को देश छोड़ने को कहा है। खुद अमित शाह ने देश के सभी मुख्यमंत्रियों से राज्य में सर्चिंग कर ऐसे लोगों को वापस भेजने को कहा है। वहीं, ये ग्रुप सिंध पाकिस्तान से 22 अप्रैल को ही यहां पहुंचे हैं। जिन्होंने 25 अप्रैल को प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात की और कहा कि हमें वापस नहीं जाना है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों और विजय शर्मा के बीच बातचीत का वीडियो खुद गृहमंत्री विजय शर्मा ने पोस्ट किया है। मिनिस्टर के सामने बैठे लोगों ने खुद को सिंधी समुदाय का हिंदू बताया और प्रदेश में रहने दिए जाने की गुजारिश की है। कौन हैं ये पाकिस्तानी लोग जो विजय शर्मा से मिले उपमुख्यमंत्री शर्मा से मिलने पहुंचे सुखदेव लुंद पाकिस्तान में सिंध के घोटकी जिला के खानपुर के रहने वाले हैं। वहां हिंदुओं की आबादी 3-4 हजार है। सुखदेव फिलहाल 45 दिनों के विजिटर वीजा पर रायपुर के शदाणी दरबार पहुंचे। साथ में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। इनके अलावा रवि लुंद, निर्भय बत्रा, रोशन लाल और महेंद्र लाल भी अपने परिजन के साथ उसी दिन रायपुर पहुंचे। दल में 24 सदस्य हैं। इसके अलावा लगभग 100 और लोगों का जत्था भी लगभग एक माह पहले से रायपुर में है। तो छत्तीसगढ़ सरकार क्या करेगी गृहमंत्री विजय शर्मा ने इन पाकिस्तानी नागरिकों आश्वस्त किया कि इन्हें आम पाकिस्तानी नागरिक के बजाय ‘पाकिस्तान पीड़ित’ के रूप में देख रहे हैं। इस मामले में केंद्र सरकार से बात करेंगे, ताकि उन्हें वापस नहीं जाना पड़े। ये लोग अपनी संपत्ति छोड़कर रायपुर आ गए हैं। इसलिए हम इन्हें ‘पाकिस्तान पीड़ित’ मानकर इनके मामले में प्राथमिकता के साथ विचार करेंगे। सार्क वीजा वालों की जांच शुरू छत्तीसगढ़ में पाकिस्तान से आए करीब 2000 लोग रहते हैं। इसमें 1800 सिर्फ रायपुर में ही हैं। पाकिस्तान से रायपुर आने वाले 95 फीसदी लोग सिंधी समाज के हैं। बाकी मुस्लिम हैं। पुलिस जांच कर रही है कि जो 2000 लोग छत्तीसगढ़ में आए या रह रहे हैं वे किस वीजा के तहत आए हैं। पुलिस सार्क वीजा वालों की तलाश कर रही है। क्योंकि केंद्र सरकार ने अभी केवल सार्क वीजा में आए लोगों को ही देश छोड़ने का निर्देश दिया है। पुलिस ने बताया कि सार्क वीजा 24 श्रेणी के लोगों को तुरंत दिया जाता है। पाकिस्तान से आए कई लोगों ने सड्‌डू, महावीरनगर, बोरियाकला और माना रोड पर घर बना लिया है। अब ये लोग भारत की नागरिकता भी ले रहे हैं। हालांकि कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें नागरिकता नहीं मिली है। ऐसे लोगों की अब पहचान की जा रही है। नए सिरे से इनकी सूची तैयार की जा रही है। रायपुर के SSP लाल उमेद सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा है कि रायपुर में रहने वाले पाकिस्तानियों की जांच की जा रही है। उनके दस्तावेजों की जांच के साथ थाने में सत्यापन किया जाएगा। क्या है सार्क वीजा ? सार्क वीजा 1992 में सार्क के सदस्य देशों के बीच यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। सार्क देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। यह पहल इस्लामाबाद में 1988 के सार्क शिखर सम्मेलन में सामने आयी थी। इस योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को उनके देशों की ओर एक स्पेशल वीजा स्टिकर जारी किया जाता है, जिससे उन्हें अलग-अलग वीजा की जरूरत नहीं पड़ती है। इस सुविधा को अब पहलगाम अटैक के बाद खत्म किया गया है। पाकिस्तानी हिंदुओं को केंद्र सरकार ने छूट दी है पहलगाम अटैक के बाद पाकिस्तान से आए मुस्लिमों पर सख्ती है। 7 दिन में सभी को भारत छोड़ना होगा। हालांकि विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि ज‍िन पाकिस्तानी हिंदुओं को लॉन्ग टर्म वीजा जारी किए गए हैं, उन्हें वापस नहीं जाना होगा। पाकिस्तान से बड़ी संख्या में हिन्दू पलायन कर भारत आए हैं और यहां की नागरिकता के ल‍िए आवेदन कर रहे हैं। भारत सरकार के पाकिस्तान के नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित करने के निर्णय के बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पहले से जारी किए गए लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी) पर लागू नहीं होगा। क्या है लॉन्ग टर्म वीजा दरअसल, एलटीवी पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक – जिनमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को जारी किया जाता है। लॉन्ग टर्म वीजा उन परिस्थितियों में भी किसी नागरिक को जारी किया जा सकता है जब वो ये जाहिर करे कि उसका भारत से काफी ज्यादा लगाव है। लॉन्ग टर्म वीजा आमतौर पर पांच साल के लिए जारी किया जाता है। नागरिकता देने का क्या है नियम भारत की नागरिकता के लिए किसी भी शख्स को कुछ शर्तें पूरी करनी होती है, नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले को ये बताना होता है कि वो किस वजह से अपने देश की जगह भारत की नागरिकता लेना चाहता है। आमतौर पर लोग अपने देश में हो रहे अत्याचार और शोषण का हवाला देते हुए आवेदन करते हैं। नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत लोगों को नागरिकता देने का काम किया जाता है, इस अधिनियम में कई बार संशोधन हो चुके हैं। 26 जनवरी 1950 के बाद भारत में जन्म लेने वाला हर शख्स भारत का नागरिक है। 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेना वाला कोई भी व्यक्ति तब भारत का नागरिक माना जाएगा, जब उसके जन्म के वक्त उसके माता या पिता भारत के नागरिक रहे हों। अगर कोई दूसरे देश का व्यक्ति भारत में 11 साल से रह रहा है तो वो नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है। सीएए में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गैर मुस्लिम लोगों के लिए इस सीमा को पांच साल कर दिया गया है। नागरिकता के लिए आवेदन गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर किया जा सकता है। Indiancitizenshiponline.nic.in पर जाकर भी आवेदन कर सकते हैं। क्या प्रदेश में पाकिस्तानियों को नागरिकता मिली छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हाल ही में पाकिस्तान से आकर रह रहे 3 पाकिस्तानियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत भारत की नागरिकता मिल गई है। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने उन्हें नागरिकता प्रमाण पत्र दे दिया है। अब वो भारतीय कहलाएंगे। कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने बताया कि, रामी बाई, बेबी हर्षिता और मयंक साल 2007 में पाकिस्तान से भारत आए थे। दुर्ग के वार्ड क्रमांक-26 सिंधी कॉलोनी में रहने लगे। उस समय उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए अप्लाई किया था। अनुमति मिलने के बाद तीनों काफी खुश हैं।

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