पाकुड़ शहर के प्रसिद्ध दूधनाथ मंदिर में बसंत पंचमी के अवसर पर भगवान भोलेनाथ का पारंपरिक तिलकोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। निर्धारित मुहूर्त के अनुसार पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का तिलक संपन्न कराया। पूजा-अर्चना के दौरान भगवान भोलेनाथ को फल, गुलाल, दूध और भांग अर्पित किए गए। जैसे ही तिलकोत्सव संपन्न हुआ, मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और एक-दूसरे को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दीं। सरस्वती पूजा के दिन होता है तिलकोत्सव धर्म जागरण के विश्वनाथ भगत ने बताया कि दूधनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ का तिलकोत्सव वर्षों पुरानी परंपरा है, जिसका निर्वहन हर साल बसंत पंचमी के दिन किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा के दिन भगवान शिव का तिलकोत्सव होने से एक प्रकार से होली के पर्व का भी शुभारंभ हो जाता है। कार्यक्रम के समापन के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर अशोक भगत, सुनील तौला, उनकी धर्मपत्नी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने मंदिर परिसर में देर रात तक भजन-कीर्तन कर धार्मिक माहौल को और भक्तिमय बना दिया। धूमधाम से मनी सरस्वती पूजा शुक्रवार को पाकुड़ जिले भर में सरस्वती पूजा पूरे उत्साह और शांतिपूर्ण माहौल में मनाई गई। पूजा को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अंचल अधिकारी अरविंद बेदिया और नगर थाना प्रभारी राहुल गुप्ता ने पुलिस बल के साथ विभिन्न पूजा पंडालों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने पूजा समिति के सदस्यों से आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ पूजा संपन्न कराने की अपील की। अंचल अधिकारी ने बताया कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। प्रशासन की सतर्कता के कारण जिले में सरस्वती पूजा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।


