पाकुड़ जिले में मकर संक्रांति का पर्व बुधवार को आदिवासी समुदाय द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। हालांकि, जिले में यह पर्व मुहूर्त के अनुसार दो दिनों तक मनाया जाएगा, लेकिन आदिवासी समुदाय ने अपने पुरोहितों के सानिध्य में इसे आज ही संपन्न किया। इस अवसर पर पाकुड़िया थाना क्षेत्र के सिद्धपुर स्थित गरमकुंड में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग उमड़े। वहीं, हिरणपुर प्रखंड से गुजरने वाली परगला नदी के तट पर भी पाकुड़ जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भगवान शिव और देवी पार्वती की भी पूजा-अर्चना की श्रद्धालुओं ने मुहूर्त के अनुसार नदी में पवित्र स्नान किया और इसके बाद अपने पुरखा बाबाओं द्वारा करवाई जा रही पूजा में शामिल हुए। इस दौरान, उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव और देवी पार्वती की भी पूजा-अर्चना की। मौके पर मौजूद पुरखा बाबाओं ने बताया कि मकर संक्रांति पर्व पर शिव-पार्वती और सूर्य देवता की पूजा की जाती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हर वर्ष की तरह इस बार भी नदी के किनारे एक मेले का आयोजन किया गया है। इस दौरान, कई सामाजिक संगठनों ने लोगों के बीच वस्त्र और कंबल का वितरण भी किया। मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग बिहार के बांका जिले में स्थित मंदार हिल भी जाते देखे गए। खासकर आदिवासी समुदाय के लोग मकर संक्रांति पर्व को पूरे भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। जनवरी माह में आदिवासी समुदाय द्वारा सोहराय पर्व भी पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति सूर्य देवता की आराधना का पर्व है, जिसमें लोग नदियों, तालाबों और गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में तिल से बने लड्डू का सेवन करते हैं। पर्व को लेकर गांव-गांव में खासा उत्साह देखा जा रहा है, और आदिवासी समुदाय के लोग इस उत्सव को लेकर विशेष रूप से उत्साहित हैं।


