पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में रेलवे से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पत्थर व्यवसायियों द्वारा 16 जनवरी से पत्थर लोडिंग का कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है। तीसरे दिन भी इस आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला। पाकुड़ जिले की तीनों प्रमुख पत्थर लोडिंग साइडिंग पर सन्नाटा पसरा रहा और कहीं भी रेलवे रैक में पत्थर लोडिंग नहीं हो सकी। इस बंदी से करीब 500 मजदूर सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। मजदूरों का कहना है कि पत्थर लोडिंग पूरी तरह बंद होने से वे बेरोजगार हो गए हैं और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई मजदूर साइडिंग पर दिनभर बैठे रहे, लेकिन काम शुरू होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई। मजदूर बोले- सिर्फ पत्थर नहीं, कोयला लोडिंग भी हो बंद आंदोलन को मजदूरों का समर्थन तो मिल रहा है, लेकिन वे इसे और प्रभावी बनाने की बात कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि केवल पत्थर लोडिंग बंद करने से दबाव पर्याप्त नहीं बनेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोयला लोडिंग भी बंद की जाए तो इसका असर कहीं ज्यादा व्यापक होगा। मजदूरों ने बताया कि पाकुड़ जिले से दो बड़ी कोयला कंपनियां कोयला उत्खनन करती हैं। यह कोयला रेलवे रैक के माध्यम से पश्चिम बंगाल और पंजाब भेजा जाता है। यदि कोयला लोडिंग भी रोक दी जाए, तो रेलवे और संबंधित कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा और मांगों को लेकर जल्दी समाधान निकल सकता है। मजदूरों का कहना है कि आंदोलन लंबा खिंचने से सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें ही झेलना पड़ेगा। रेलवे और सरकार को भारी नुकसान पत्थर लोडिंग बंद होने से रेलवे को प्रतिदिन करीब 2 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जबकि राज्य सरकार को भी प्रतिदिन लगभग 40 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंदोलन का असर सीधे पत्थर व्यवसायियों पर भी पड़ा है, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। व्यवसायियों की प्रमुख मांगों में कोविड काल में बंद की गई ट्रेनों का पुनः परिचालन शुरू करना शामिल है। इसके साथ ही इस रूट से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस ट्रेनों का पाकुड़ और साहिबगंज रेलवे स्टेशनों पर ठहराव सुनिश्चित करने की मांग की गई है। पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने, यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई है। फिलहाल न तो रेलवे प्रशासन और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन मिला है, जिससे आंदोलन के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।


