धनबाद के ओम प्रकाश तिवारी बने सीडीपीओ:राज्य में मिला है 31वां स्थान, आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बोझ के बीच पाई सफलता

धनबाद के पथराकुली क्षेत्र निवासी ओम प्रकाश तिवारी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) परीक्षा में राज्य स्तर पर 31वां स्थान हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद से उनके घर से लेकर पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल है। मिठाइयां बांटी जा रही हैं। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस सफलता के साथ ही ओम प्रकाश तिवारी को झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग में सीडीपीओ के पद पर नियुक्ति मिलने जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उपलब्धि सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि संघर्ष और मेहनत की जीत है। जिम्मेदारियों का बोझ, फिर भी नहीं मानी हार ओम प्रकाश तिवारी का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में पढ़ाई की। उनके पिता नैना तिवारी मजदूरी करने के साथ-साथ गाय का दूध बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाते थे। मां के असमय निधन के बाद परिवार पर जिम्मेदारियां और बढ़ गईं, लेकिन ओम प्रकाश ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी तीनों छोटी बहनों ने अपने सपनों को पीछे रखकर पथराकुली फुटबॉल मैदान के पास एक छोटा सा कोचिंग संस्थान शुरू किया। इसी सीमित आय से घर का खर्च चलता रहा और ओम प्रकाश की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रही। उन्होंने हाई स्कूल धनबाद से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज से आईएससी और मगध विश्वविद्यालय, गया से गणित ऑनर्स में प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत जेपीएससी सीडीपीओ में सफलता ओम प्रकाश की पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले वे बीपीएससी 2023 के तहत बिहार पंचायत ऑडिट सर्विस में चयनित हो चुके हैं। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पास कर वे बोकारो में श्रम परिवर्तन पदाधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा एसएससी सीजीएल में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 59वां रैंक हासिल किया था। इस दौरान उन्हें कई असफलताओं का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने कुल सात मुख्य परीक्षाएं और छह साक्षात्कार दिए। ओम प्रकाश का मानना है कि असफलता ही सफलता की सबसे बड़ी शिक्षक होती है। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में एनसीईआरटी की किताबों को गंभीरता से पढ़ना और सीमित संसाधनों में निरंतर अभ्यास करना सफलता की कुंजी है।

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