पाठ्यपुस्तक निगम बिहार-झारखंड की तर्ज पर चलेगा:छत्तीसगढ़ पापुनि किताबें छपवाने व बंटवाने का एक ही टेंडर ​निकालेगा, इस तरह बचाएगा 20 करोड़ रुपए

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने एक अहम निर्णय लिया गया है। अब छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (छग पापुनि) की किताबों को लेकर एक ही टेंडर होगा। जिस कंपनी को ठेका मिलेगा वही मिल से कागज खरीदकर, छपाई कर स्कूलों तक किताबें पहुंचाएगी। अधिकारियों का दावा है कि इससे शासन को 20 करोड़ रुपए तक की बचत होगी। पहले इस प्रक्रिया के लिए छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से ​तीन टेंडर किए जाते थे। पहला- टेंडर करके 100 करोड़ रुपए के पेपर की खरीदी होती थी। दूसरा- 20 करोड़ खर्च कर इन पेपर से किताबें छपवाई जातीं थीं। तीसरा- छपी हुई इन किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने में दो से ढ़ाई करोड़ रुपए ट्रांसपोर्टिंग खर्च होता था। जबकि इस बीच किताब व कागज दूसरे जगह जाने की कई शिकायतें भी मिलतीं थीं। अब ये पूरा काम एक ही टेंडर में होगा। बिहार और झारखंड में इसी तरह की प्रक्रिया लागू है। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से 3 अफसरों की अध्ययन टीम बिहार गई थी। तीन दिनों के अवलोकन के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। ये व्यवस्था अगले सत्र के लिए छत्तीसगढ़ में लागू की जाएगी। हर साल डिपो का कि​राया ही 15 करोड़ से ज्यादा चुका रहे
किताबें छापने का एक ही टेंडर होने से शासन को बड़ा फायदा होगा। वजह- वर्तमान व्यवस्था के मुताबिक, किताबें छपाई के बाद डिपो में रखी जाती हैं। यहां से किताबों का वितरण होता है। रायपुर में 6 डिपो हैं। इसी तरह अन्य जिलों में भी डिपो हैं। हर साल यहां किताबें रखने का किराया ही लगभग 15 करोड़ रुपए से ज्यादा का होता है। जो अब पूरी तरह से बचेगा। पेपर दूसरे राज्य में पहुंचने जैसे गड़बड़ी बंद, इधर जांच शुरू
अफसरों काे संदेह है कि मिल से ही जीएसएम पेपर मध्यप्रदेश गया है। मिलर्स ने पहले से ज्यादा पेपर की छपाई की होगी। इस बार पापुनि से कम किताबों की छपाई का टेंडर हुआ था, इसलिए बचा हुआ पेपर मध्यप्रदेश में सप्लाई कर दिया गया होगा। जबकि यह गलत है। इससे पहले दो बार ऐसा मामला आ चुका है, जब किताबें कबाड़ दुकान में मिलीं थीं। अब इन्हीं सब गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। प्रति पेज व फर्मा के हिसाब से होगा टेंडर
अवलोकन रिपोर्ट के मुताबिक अब छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम से​ किताब ​की प्रति पेज व प्रति फर्मा (16 पेज एक फर्मा के बराबर होते हैं) के हिसाब से टेंडर होगा। बिहार में इसी पैटर्न पर टेंडर होता है। प्रति पेपर 3 से साढ़े तीन रुपए खर्च आने की बात कही जा रही है। नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का खर्च और समय दोनों बचेंगे। इस व्यवस्था को अगले सत्र के लिए किताबें छापने के साथ ही लागू करेंगे।
– गजेंद्र यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़

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