पानी में ई-कोलाई तो मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा:साइलेंट किलर: पहले दस्त, फिर उल्टी… आंतों से खून में पहुंचता है संक्रमण

जल ही जीवन है, लेकिन जब यही पानी ई-कोलाई बैक्टीरिया से दूषित हो जाए, तो यह जीवन के लिए घातक बन सकता है। इंदौर के भागीरथपुरा में सामने आई घटना इसका भयावह उदाहरण है, जहां अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि ई-कोलाई बैक्टीरिया सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल के ग्राउंड वॉटर में भी पाया जा चुका है। ऐसे में यह रिपोर्ट बताती है कि ई-कोलाई की चपेट में आने पर शरीर में किस तरह के बदलाव होते हैं और किन लक्षणों की समय पर पहचान कर पीड़ित को सही इलाज दिलाया जा सकता है, ताकि जान बचाई जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैक्टीरिया शरीर को तीन चरणों में नुकसान पहुंचाता है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण सेप्टीसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेलियर तक पहुंच सकता है। हालांकि, यदि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर सही उपचार मिल जाए, तो इसे सामान्य बीमारी की तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे पहले आंतें होती हैं प्रभावित
भोपाल वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि कुछ कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मेडिकल भाषा में ग्राम निगेटिव रॉड्स कहलाते हैं। इनमें ई-कोलाई और विब्रियो कॉलरी सबसे अधिक खतरनाक माने जाते हैं। ई-कोलाई की भी दो प्रमुख किस्में एंट्रोटॉक्सीजिनिक और एंट्रोइनवेसिव होती हैं। ये बैक्टीरिया आमतौर पर सीवेज और गंदे पानी में पाए जाते हैं। जब किसी कारण से सीवेज पीने के पानी में मिल जाता है और वह पानी शरीर में पहुंचता है, तो बैक्टीरिया सीधे आंतों पर हमला करता है। आंत से खून तक पहुंचता है संक्रमण
डॉ. गुप्ता के अनुसार, शुरुआत में ई-कोलाई आंतों की परत को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद यह बैक्टीरिया खून में मिल जाता है, जिससे सेप्टीसीमिया की स्थिति बनती है। सेप्टीसीमिया यानी खून में संक्रमण, जो बेहद खतरनाक होता है। यही स्थिति आगे चलकर मल्टी ऑर्गन फेलियर का कारण बनती है।
कई मामलों में डायरिया और उल्टी के चलते शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है, जिससे सबसे पहले किडनी फेल होने लगती है। इसके बाद लीवर, फेफड़े और दिल जैसे अन्य अंग भी प्रभावित होने लगते हैं। ज्यादातर मौतों में यही मल्टी ऑर्गन फेलियर मुख्य वजह बनता है। भोपाल में भी मिल चुका यह बैक्टीरिया
22 दिसंबर को आई जांच रिपोर्ट में भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का ग्राउंड वाटर दूषित पाया गया। इन इलाकों से लिए गए चार सैंपल फेल हो गए, जिनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा में भी पाया गया था, जहां अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे भोपाल में भी संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है। ये खबर भी पढ़ें…
नाली के पानी को निगम ने बताया ‘शुद्ध’…पीने लायक भोपाल में नाली का पानी भी पीने लायक है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि नगर निगम के अमले ने जल सुनवाई के दौरान वाटर टेस्टिंग के बाद इसे माना है। जी हां, नाली के पानी को वार्ड ऑफिस में महज 15 सेकंड में हुए टेस्ट में ‘शुद्ध’ बता दिया गया। इससे समझा जा सकता है कि भोपाल के किसी भी वार्ड में इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हालात कभी भी बन सकते हैं।पूरी खबर पढ़ें

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