पायलट बोले- किरोड़ी कह-कह थक गए फोन टैप हो रहा:मंत्रियों के जवाब पर बीजेपी विधायक छाती पीट रहे

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने कहा है कि सरकार में झगड़े चल रहे हैं। किरोड़ीलाल मीणा कह कहकर थक गए कि मेरा फोन टैप हो रहा हैं, ना तो उनको निकालते हैं ना उनको काम देते हैं। सरकार में अब आपस में गतिरोध है। कई पावर सेंटर हैं। सरकार में खिंचाव और दिल्ली जयपुर में तनाव है, उसका कारण है कि सदन को नहीं चलाना चाहते। पायलट ने कहा- सरकार नहीं चाहती कठोर सवाल पूछे जाए। मंत्रियों के जवाब पर सत्ता पक्ष के विधायक छाती पीट रहे हैं। सरकार की खराब परफॉर्मेंस छुपाने के लिए यह सबसे आसान तरीका है कि गतिरोध पैदा करो। सदन को चलाना विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं पायलट ने कहा- हम सब ने मिलकर निर्णय किया है। हमारे छह विधायकों को निलंबित किया है, पूरा विधायक दल नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में सब साथ रहेंगे। सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी होती है, सदन को चलाना विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। हम लोग आज भी कह रहे हैं सिर्फ वह मंत्री और मुख्यमंत्री बोल दे कि इंदिरा गांधी के प्रति दुर्भावना नहीं है। पायलट विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। अगर वह भी नहीं करना चाहते फिर हम लोग भी यहीं है और सरकार भी यही हैं, हम डटकर मुकाबला करेंगे और पूरे देश में करेंगे। हमने तय किया है हम सभी 66 विधायक एकजुट रहेंगे। सरकार को सदन चलाना है तो तो मंत्री से माफी मंगवा ले, हम सदन चलाने तैयार हैं।
बीजेपी सरकार जानबूझकर नेताओं को अपमानित करती है ताकि उत्तेजना फैले सचिन पायलट ने कहा- देश की ऐसी पूर्व प्रधानमंत्री जिसने देश के लिए अपने पेट में 32 गोलियां खाई उसके लिए मंत्री ने जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया वो गलत था। यह परंपरा होती है कि जो इस सदन का सदस्य नहीं है और जो दुनिया में नहीं है उसके खिलाफ इस तरह की बात बोलना गलत है। प्रश्न काल में तो उसका कोई संदर्भ नहीं था। मंत्री की धारणा इंदिरा गांधी को जानबूझकर अपमानित करने की थी ताकि सदन में और देश में जानबूझकर उत्तेजना फैले। जिस मंत्री ने जानबूझकर इंदिरा गांधी का अपमान किया। भारत सरकार संसद में अंबेडकर को अपमानित करती है और राजस्थान सरकार विधानसभा में इंदिराजी को अपमानित करती है। इनकी सोची समझाी रणनीति है कि नेताओं का अपमान करो ताकि सवाल न पूछे जाएं। पायलट ने कहा- बीजेपी की रणनीति है कि पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के बारे में कीचड़ उछालो, भला बुरा कहो। यह किसी मंत्री को शोभा नहीं देता। मुख्यमंत्री को आकर स्पष्टीकरण करना चाहिए था। सदन की कार्यवाही से स्पीकर को निकालना चाहिए था। तीन-चार दिन के धरने के बाद सहमति बनी कि दोनों पक्ष अपनी बात रखेंगे। हर गतिरोध का समाधान चर्चा के बाद होता है। हमारे नेताओं ने खेद प्रकट किया, इसके बावजूद भी सरकार के मंत्री ने खेद प्रकट करना ठीक नहीं समझा, मुख्यमंत्री ने ठीक नहीं समझा कि उसे कार्यवाही से निकलवाए। हमसे खेद प्रकट करवा लो और अपनी बारी आए तो पीछे हट जाओ यह गलत पायलट ने कहा- आपने बिना चेतावनी के छह विधायकों को सस्पेंड किया। आपको लगता है आप छह विधायकों को सस्पेंड कर दो, तो लोग आपको बहादुर समझेंगे। यह सदन प्रदेश की जनता की अमानत है, सदन सत्ता की संपत्ति नहीं है। सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों गाड़ी के दो पहिए हैं। आप नेताओं को अपमानित करो, निलंबित करो, हमारी बात को सुनो न,हीं हमारे से आप खेद प्रकट करवा लो और अपनी बारी आए तो पीछे हट जाओ, यह नैतिकता के आधार पर गलत है। हम बीजेपी के दिवंगत नेताओं के बारे में बोलेंगे तो कैसा लगेगा?
पायलट ने कहा- पदों पर रहे दिवंगत नेताओं के बारे में गलत बोलने की परंपरा हमारे देश में नहीं रही है। हमारे देश की परंपरा ऐसी नहीं है कि पदों पर रहे दिवंगत नेताओं के बारे में गलत बोला जाए। बीेजपी के बहुत से नेता पदों पर रहे, वे अब दुनिया में नहीं है, हम उनके बारे में गलत बोलेंगे तो कैसा लगेगा? यह नई तरह की राजनीति नकारात्मक राजनीति है।

मंत्री ने इंदिरा गांधी को अपमानित किया, खेद प्रकट करने में इनकी नाक कट रही है पायलट ने कहा- मैं आपकी गलतफहमी दूर कर दूं। नेता प्रतिपक्ष और प्रदेशाध्यक्ष हम एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, यह व्यक्तिगत इश्यू नहीं है। मुद्दा यह नहीं है कि गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने क्या बोला? मुद्दा यह है कि मंत्री ने इंदिरा गांधी अपमानित किया, उस पर खेद प्रकट करने में उनकी नाक कट रही है। यह जिम्मेदारी मंत्री की नहीं मानता, इसमें पूरी सरकार की जिम्मेदारी है।

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