पारंपरिक रीति-रिवाजों की पहचान को धुमकुड़िया से ही बचाया जाएगा : विनोद

भास्कर न्यूज | लातेहार सदर प्रखंड के आरागुंडी गांव के बुधवार को सरना स्थल स्तिथि धुमकुड़िया भवन में निःशुल्क पारंपरिक शिक्षण संस्थान का शुभारंभ किया गया। संस्थान का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव, उरांव समाज समन्वय समिति के स्टेट कन्वेनर रंथु उरांव और सेवानिवृत्त शिक्षक सकेन्दर उरांव ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया। जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने कहा कि आदिवासी बोली, भाषा और पारंपरिक रीति-रिवाजों की पहचान को धुमकुड़िया के माध्यम से बचाया जा सकता है। उन्होंने हर गांव में धुमकुड़िया की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उरांव समाज के लोग आज भी शिक्षा से वंचित है। उन लोगों को शिक्षा से जोड़ने की बात कहीं। रंथु उरांव ने कहा उरांव समाज को आगे बढ़ना है तो पढ़ाई जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा वो ताकत है। जितना पढ़ेंगे, उतना कामयाब होंगे। सेवानिवृत्त शिक्षक सकेंदर उरांव ने गांव वालों की सराहना की और कहा कि सरकारी सेवा के बाद गांव की सेवा का अवसर मिला है। समुदाय के सहयोग से ऑनलाइन शिक्षा के लिए एलइडी टीवी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मौके पर मोती उरांव, जयराम उरांव, लखन उरांव, अनिल उरांव, संदीप उरांव, निर्मला उरांव, देवंती उरांव समेत महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद थे। 50% अनुदान में उपलब्ध है बीज: कृषि पदाधिकारी जिला कृषि पदाधिकारी अमृतेश कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 50% अनुदान में उपलब्ध कराया गया बीज सभी प्रखंड व लैंप्स में भेज दिया गया है। किसान यहां से संपर्क कर अनुदान में बीज ले सकते हैं।उन्होंने कहा कि बारिश खुल गई है। इस मौसम में धान का बिचड़ा व मकई का खेती लगाना बेहतर होगा। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में कुल 30000 हेक्टेयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। डीएओ ने जिले के किसानों से बीज योजना का लाभ लेने को कहा है।

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