पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत:राजगढ़ समेत 13 जिलों को मिलेगा फायदा; सीएम बोले- पश्चिमी मध्यप्रदेश को पर्याप्त जल और सिंचाई सुविधा मिलेगी

मध्यप्रदेश से गुजरने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट की मंगलवार (17 दिसंबर) से शुरुआत हुई हैं। जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एमपी, राजस्थान और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के बीच त्रिस्तरीय एग्रीमेंट (एमओयू) बआ। इस कार्यक्रम में एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट मौजूद रहें। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो अभियान से राजगढ़ जिले समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश के 13 जिलों के 3217 गांवों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- यह परियोजना राजगढ़ सहित मालवा और चंबल क्षेत्र में जल संकट को समाप्त करेगी। इस परियोजना के तहत 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई और 40 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 72 हजार करोड़ रुपए की इस ऐतिहासिक परियोजना को मंजूरी दी है, जो न केवल सिंचाई और पेयजल के संकट का समाधान करेगी बल्कि कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास में नई ऊर्जा भरेगी। 21 बांध और बैराज होंगे निर्मित परियोजना के अंतर्गत 21 बांध और बैराज का निर्माण किया जाएगा। इनसे कुल 1908.83 मिलियन घन मीटर जल भंडारण होगा, जिसमें से 172 मिलियन घन मीटर पानी पेयजल और उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगा। राजगढ़ सहित इन जिलों को मिलेगा लाभ राजगढ़ के अलावा शाजापुर, उज्जैन, आगर, धार, इंदौर, सीहोर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों में इस परियोजना का लाभ मिलेगा। इसके जरिए न केवल सिंचाई के लिए पानी मिलेगा बल्कि औद्योगिक और पेयजल आपूर्ति में भी सुधार होगा। चंबल नहर प्रणाली होगी आधुनिकीकरण सीएम यादव ने बताया कि इस परियोजना में लगभग 60 वर्ष पुरानी चंबल दाईं मुख्य नहर और वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण भी शामिल है। इससे भिंड, मुरैना और श्योपुर के किसानों को उनकी मांग के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जाएगा। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच लंबे समय से रुके इस समझौते को अमलीजामा पहनाया गया है। समझौते के तहत परियोजना की लागत का 90% हिस्सा केंद्र सरकार और 10% हिस्सा राज्य सरकारें वहन करेंगी। मध्यप्रदेश इसमें 35 हजार करोड़ रुपए, जबकि राजस्थान 37 हजार करोड़ रुपए व्यय करेगा। राजगढ़ को मिलेगा विशेष लाभ राजगढ़ जिले में यह परियोजना न केवल पेयजल संकट को हल करेगी, बल्कि किसानों के लिए सिंचाई की बेहतर व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल भगवान की देन है, और इसका सही उपयोग समाज के हित में करना सरकार का कर्तव्य है।

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