पाली जिले के जवाई-बांध रेलवे स्टेशन का नाम अब सुमेरपुर-जवाई बांध हो गया है। अब रेलवे की टिकट इसी नाम से जारी की जा सकेंगी। सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्थान सरकार के प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव की सहमति के अनुसरण में सामान्य प्रशासन विभाग ने जवाई बांध रेलवे स्टेशन के नाम में संशोधन की स्वीकृति जारी की है। इसकी सूचना जारी होते ही सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत को धन्यवाद देने लोग उनके पास पहुंचे। कैबिनेट मंत्री कुमावत का किया स्वागत सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत के प्रयासों से इस रेलवे स्टेशन का नाम संशोधित होने पर शनिवार को उनका स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। पाली जिले के प्रवास के दौरान सुमेरपुर में अपने घर पहुंचे कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का स्वागत किया गया। गौरतलब है कि इस रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तित करने के संबंध में स्थानीय निवासियों तथा कई जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। सुमेरपुर निवासियों ने पाली सांसद पीपी चौधरी और स्थानीय विधायक जोराराम कुमावत को ज्ञापन दिए गए। इसके बाद कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को इस संबंध में अवगत कराया, जिस पर संशोधन के आदेश जारी कर दिए गए। इस दौरान लोगों ने कहा- कैबिनेट मंत्री ने इसके लिए प्रयास किए। उन्होंने सड़कों और स्टेशन के विकास को लेकर केंद्र तक बात पहुंचाई। राजस्थान में जवाई बांध की अलग पहचान पाली जिले के लिए सुमेरपुर का जवाई बांध किसी वरदान से कम नहीं है। जब बारिश कम होती है तो जवाई बांध सूख जाता है। इसके बाद पीने के पानी और सिंचाई के लिए हाहाकार मचने लगता है। हालात ये पैदा होते हैं कि पानी की रेलगाड़ी चलानी पड़ती है। जब खबर आती है कि जवाई बांध में 3 महीने का पानी आ गया है तो मिठाइयां बांटी जाती हैं। इस बार के मानसून सीजन में 1 साल का पानी स्टोर हुआ है। इस बांध का कुल गेज 61.25 फीट है, जबकि इसमें पानी की आवक मंगलवार (17 सितंबर) तक 53.05 फीट हो चुकी है। इस बार मानसून सीजन अच्छा जा रहा है। बारिश का दौर चल रहा है। किसानों और लोगों के चेहरे खिले हुए हैं। जवाई बांध में पानी स्टोर होता है तो सिर्फ पाली ही नहीं बल्कि सिरोही और ब्यावर जिलों के लोगों की भी पेयजल समस्या खत्म हो जाती है। तीन जिलों के 900 गांवों में जवाई बांध से पेयजल की सप्लाई होती है। इसके पानी से पूरे क्षेत्र के 50 हजार किसान सिंचाई कर पाते हैं। जवाई कमांड एरिया में मुख्य नहर की लंबाई 23 किलोमीटर है। इसके अलावा वितरिका-माइनर को मिलाकर लंबाई 234 किलोमीटर है। पढ़ें ये खबर भी… ऐसा बांध, जो सूखे तो चलानी पड़ती है वाटर ट्रेन:900 गांवों की प्यास बुझाता है जवाई डैम; मानसून सीजन में आया एक साल का पानी वह साल 2005 था, जब पाली जिले में पीने के पानी का भीषण संकट पैदा हुआ। सरकार ने पानी की सप्लाई के लिए पहली बार वाटर ट्रेन चलाई। पाली में पाली की किल्लत का हाल ये है कि 2022 तक ये ट्रेन 6 बार चल चुकी थी। ट्रेन के 40 वैगन जोधपुर से पानी लेकर चलते तो पाली की प्यास बुझती थी। (पढ़ें पूरी खबर)


