पाली शहर में रविवार को कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी के सानिध्य में शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा अणुव्रत नगर ग्राउंड में आयोजित 9 दिवसीय साधना, लक्ष्मी महायज्ञ एवं भैरव पुराण कथा के समापन अवसर पर निकाली गई। समापन दिवस पर भव्य कलश यात्रा ने नगरवासियों का मन मोह लिया। दोपहर करीब 12 बजे कलश यात्रा बालिया स्कूल के पास स्थित रामदेव मंदिर से शुरू हुई। शोभायात्रा की विशेष बात यह रही कि जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी महाराज स्वयं पदयात्रा करते हुए श्रद्धालुओं के साथ चले। मार्ग में सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों द्वारा अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर भावभीना स्वागत किया गया। जयकारों से पूरा बाजार गूंज उठा। सेवा और समर्पण का अद्भुत दृश्य
रास्ते में 50 से अधिक स्थानों पर पानी, मिठाई, जूस, टॉफी आदि के सेवा स्टॉल लगाए गए। श्रद्धालुओं ने सेवा भाव से शोभायात्रियों का स्वागत किया। डीजे, ढोल और झांकियों ने बांधा समां
शोभायात्रा में सबसे आगे डीजे, इसके बाद हाथी, नौ अश्व, कलश धारण किए महिलाओं की कतार, बीजापुर बैंड, बग्गियों में सवार भक्त, कच्ची घोड़ी, पंजाब के बैंड, नासिक के ढोल और पौराणिक झांकियां शामिल रहीं। भक्त डीजे और ढोल की थाप पर डांस करते हुए आगे बढ़ते रहे। इन रास्तों से गुजरी शोभायात्रा
रामदेव मंदिर से शुरू होकर शोभायात्रा महाराणा प्रताप चौक, सराफा बाजार, घी का झंडा, धानमंडी, रुई कटला, पुरानी सब्जी मंडी, सुराणा सराय, पुराना बस स्टैंड, होते हुए अणुव्रत नगर ग्राउंड पहुंची, जहां यह सभा में परिवर्तित हो गई। कलश और इलायची सिद्ध, दिया आशीर्वाद
सभा को संबोधित करते हुए जगद्गुरु महाराज ने कहा कि कलश का जल घर को सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है, जबकि अभिमंत्रित इलायची समृद्धि बढ़ाती है। पुरुष श्रद्धालुओं द्वारा लाई गई हरे वस्त्र में बंधी इलायचियों तथा महिलाओं द्वारा लाए गए कलशों को मंत्रोच्चार के साथ सिद्ध कराया गया। शाम को महालक्ष्मी महायज्ञ की विधि-विधान से पूर्णाहुति हुई।


