पाली में 51% फसल-खराब, बेटे-बेटियों की शादी टालनी पड़ रही:किसान बोले- बेटे की फीस भरने तक के पैसे नहीं, कर्जदार बने

60 बीघा में मूंग और 20 बीघा में तिल की बुवाई की थी। सोचा था फसल आने पर जो इनकम होगी, उससे बेटी पूजा और निर्मला की शादी करूंगा, लेकिन ज्यादा बरसात होने से खेतों में पानी भर गया। सारी फसल खराब हो गई। अब बेटियों की शादी फिलहाल टालनी पड़ रही हैं। यह दर्द है किसान कूपाराम का। यह पीड़ा सिर्फ उनकी नहीं है, बल्कि पाली में ऐसे सैकड़ों किसान है, जिनके सपने बारिश ने धो दिए हैं। फसल खराब होने के कारण गुड़ सोनगिरा गांव के किसान कपूराराम को भी अपने बेटे रमेश की शादी टालनी पड़ गई हैं। किसानों का कहना है कि वे अच्छी बरसात की दुआ करते हैं, लेकिन इस बार पाली में औसत से ज्यादा बरसात होने से हमारे सपने बरसात के साथ बह गए हैं। खेत बरसाती पानी से भरने से फसल खराब हो गई। मुआवजा लेने के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे है, लेकिन पिछले साल की तरह इस साल भी आश्वासन देकर किसानों को वापस घर भेजा रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले देखिए… खेतों में भरा पानी किसान बोले- फसल से लाखों की इनकम की उम्मीद थी, लेकिन अब कर्जे में डूबे
किसानों का कहना है- जिस फसल से लाखों रुपए की इनकम होने की उम्मीद थी। आज स्थिति यह है कि वह फसल जल चुकी है और कई किसान कर्जे में है। 2 लाख हेक्टेयर में फसल खराबा हुआ हैं। फसल से होने वाली इनकम से किसान बेटियों की शादी और घरों की मरम्मत करवाना चाहते थे, लेकिन इस बार भारी बारिश ने तबाही मचाईं। खेतों में खड़ी फसल डूब गई। सपने बरसाती पानी में बह गए। पीड़ित किसान सरकार से फसल बीमा का मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उसमें हो रही देरी किसानों के घावों पर मरहम की जगह नमक लगाने का काम कर रही हैं। कर्जा लेकर फसलों की बुवाई की, लेकिन अब इनकम नहीं होने से खुद कर्जदार बन गए। 30 बीघा में फसल खराब, बेटे की कोचिंग फीस भरने में भी दिक्कत
जेतपुरा गांव के रहने वाले किसान खेताराम ने बताया- उसने 30 बीघा में मूंग की फसल बुवाई की थी, लेकिन अधिक बरसात होने से उनके खेत में पानी भर गया। इससे सारी फसल खराब हो गई। ऐसे में कोटा में इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहे बेटे लक्षित और 12वीं में पढ़ रही बेटी तेजस्वी की फीस भरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मकान की छत तक सही नहीं करवा पाऊंगा
पाली जिले के सोजत क्षेत्र के संडाणा गांव (गागुड़ा) निवासी किसान महेन्द्र सिंह बताते है- 2 हेक्टेयर में फसल की बुवाई की थी। फसल के लिए बहुत मेहनत की थी। तेज बरसात से खेतों में पानी भर गया। पूरी फसल चौपट हो गई। जिस घर में हमारा परिवा रहता है, उस घर की छत टूटी पड़ी है। सोचा था कि फसल से जो रुपए आएंगे, उससे घर की क्षतिग्रस्त छत सही करवाऊंगा, लेकिन फसल खराब होने से यह सपना अधूरा ही रह गया। अब मुआवजे के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पाली जिले के 51.39 प्रतिशत फसल खराब
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) रमेशचंद्र आमेटा ने कहा कि पाली जिले में इस बार खरीफ की बुवाई 3 लाख 90 हजार 22 हेक्टेयर में हुई। इसमें नुकसान 2 लाख 452 हेक्टेयर (51.39 प्रतिशत) में होना सामने आया है। राजस्व विभाग ने सर्वे करवा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है, जिससे किसानों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई शुरू की जा सके। बता दें कि पाली जिले में खरीफ की फसल में मुख्यत ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, ग्वार, मूंग,मोठ, उड़द, चावल की बुवाई की जाती हैं। पाली से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पाली डूबा, कलेक्टर-SP ट्रैक्टर पर बैठकर निकले:घरों में करंट फैलने का डर, हादसे से बचने के लिए JCB से पार कर रहे रास्ता पाली में दो दिन हुई मूसलाधार बारिश से पूरा शहर डूब गया। पाली शहर में रविवार सुबह 8 बजे से सोमवार शाम 5 बजे तक 252 मिमी बारिश दर्ज की गई। पूरी खबर पढ़िए ड्रोन से देखिए पाली में बारिश के बाद के हालात:3 दिन से 15 से ज्यादा कॉलोनियों में जलभराव; पैदल निकलना मुश्किल हुआ; करंट-सांप का भी डर राजस्थान का पाली शहर इस मानसून सीजन में पूरे प्रदेश में चर्चा में बना हुआ है। भारी बारिश के कारण डूबे शहर के हालात बरसात रुकने के बाद भी नहीं सुधरे हैं। पूरी खबर पढ़िए

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