पावन स्वरूपों के मामले में सरकार ने माना कार्रवाई को शिरोमणि कमेटी सक्षम : धामी

भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के मामले को लेकर एसजीपीसी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मंगलवार बुलाई गई विशेष प्रेस वार्ता में पंजाब सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं उच्च अदालत में यह माना है कि शिरोमणि कमेटी एक सक्षम संस्था है और अपने प्रबंधकीय मामलों में कार्रवाई करने का उसे पूरा अधिकार है। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज करवाना सरकार की राजनीतिक मंशा को उजागर करता है। एडवोकेट धामी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई करके सरकार श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को भी चुनौती दे रही है, क्योंकि डॉ. ईशर सिंह से करवाई गई जांच श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर हुई थी और जांच रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश भी श्री अकाल तख्त साहिब ने ही शिरोमणि कमेटी को दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिरोमणि कमेटी ने डॉ. ईशर सिंह की जांच रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करते हुए छोटे से लेकर बड़े हर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की है। ऐसे में सरकार और पुलिस की दखलअंदाजी का कोई औचित्य नहीं बनता। धामी ने कहा कि सरकार जिस हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर एफआईआर दर्ज कराने को सही ठहरा रही है, उसी मामले में सरकार ने खुद हलफनामा देकर स्वीकार किया था कि मामले का अधिकार क्षेत्र सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमीशन का है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को जवाब देने को कहा था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने गृह सचिव द्वारा डीजीपी को लिखे पत्र का उल्लेख किया, जिसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी।

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