ओंकारेश्वर ट्रस्ट के प्रबंधक ट्रस्टी को लेकर चल रहे विवाद पर खंडवा की सेशन कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मांधाता राजपरिवार के राव पुष्पेंद्रसिंह को ओंकारेश्वर ट्रस्ट का प्रबंधक ट्रस्टी नियुक्त कर दिया है। इसी पद के लिए उनके चाचा के बेटे (चचेरे भाई) विनय प्रताप सिंह ने भी दावा किया था, लेकिन कोर्ट ने ज्येष्ठता (Seniority) के आधार पर पुष्पेंद्रसिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। वे अपने पिता के ट्रस्टी पद से हटने के 32 साल बाद उत्तराधिकारी बने हैं। विपक्ष ने दलील दी थी कि पुष्पेंद्रसिंह के पिता (राव शिवशरण सिंह) को गबन के आरोप में ट्रस्टी पद से हटाया गया था, इसलिए उनके बेटे को यह पद नहीं मिलना चाहिए। इस पर द्वितीय जिला न्यायाधीश अनिल चौधरी ने कहा कि पिता की अयोग्यता का असर पुत्र के अधिकारों पर नहीं पड़ेगा। अयोग्यता व्यक्तिगत होती है, यह ‘रक्त को कलंकित’ नहीं करती। ट्रस्ट के संविधान के मुताबिक ज्येष्ठता के आधार पर राव पुष्पेंद्रसिंह ही पद के हकदार हैं। 25% हिस्सेदारी का है मामला, 4 साल में 15 गुना बढ़ी आय दरअसल, 1967 के एक आदेश के मुताबिक, प्रबंधक ट्रस्टी राजपरिवार का ही होगा और उसे मंदिर की आय का 25% हिस्सा मिलेगा। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि मंदिर की आय में जबरदस्त उछाल आया है। चाचा ने छोटे बेटे को बनाना चाहा था वारिस 1999 में गबन के आरोप में बड़े भाई राव शिवशरण सिंह को हटाकर उनके छोटे भाई राव देवेंद्र सिंह को ट्रस्टी बनाया गया था। 33 साल तक वे ट्रस्टी रहे। 4 सितंबर 2025 को देवेंद्र सिंह का निधन हो गया। अपनी बीमारी के दौरान उन्होंने अपने बड़े बेटे धर्मेश की जगह छोटे बेटे विनय प्रताप सिंह को ट्रस्टी बनाने की सिफारिश की थी। लेकिन कोर्ट ने ज्येष्ठता के नियम को मानते हुए बड़े भाई (शिवशरण) के बेटे पुष्पेंद्रसिंह को चुना। जनपद अध्यक्ष बनकर की ट्रस्ट में एंट्री राव पुष्पेंद्रसिंह ने ट्रस्ट में अपनी जगह बनाने के लिए पहले राजनीतिक रास्ता चुना। ट्रस्ट के 7 सदस्यों में एक पद ‘जनपद पंचायत अध्यक्ष’ का होता है। पुष्पेंद्रसिंह ने चुनाव लड़ा, जीते और पदेन सदस्य के रूप में ट्रस्ट में एंट्री ली। इसके बाद पुजारियों और परिवार का विश्वास जीता। बोले- श्रद्धालुओं से अभद्रता बर्दाश्त नहीं फैसले के बाद राव पुष्पेंद्रसिंह ने भास्कर से कहा, “मेरे पिता पर लगे आरोप कभी सिद्ध नहीं हुए। अब मैं व्यवस्थाएं सुधारूंगा। मंदिर के कर्मचारी श्रद्धालुओं से अभद्रता करते हैं, मैं खुद इसका भुक्तभोगी रहा हूं। इसे रोका जाएगा, ताकि दर्शनार्थी खुश होकर जाएं।”


