अगर कुछ करने की ठान ले तो कोई भी समस्या रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है आर्थिक तंगी और पारिवारिक स्थिति खराब होने के बाद भी एमपी और बाड़मेर के बच्चों ने नीट एग्जाम तो क्लियर किया ही और अब परिवार के पहले डॉक्टर होंगे। हम बात कर रहे है एमपी के रीवा की प्राची और बाड़मेर के देराज राम की। दोनों के परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन बच्चों को पढ़ाया और बच्चों ने भी मां बाप की मेहनत को जाया नहीं जाने दिया। कर्ज लेकर पढ़ाया, मां करती है मजदूरी सबसे पहले बात बाड़मेर के देराज की। बाड़मेर के सोडियार गांव के देराज ने इस साल नीट में 285 रैंक हासिल की है। अभी उसका एम्स जोधपुर में एडमिशन हो गया है। देराज के पिता घेवर राम ने बताया कि उनका हाथ और पैर सालों पहले करंट से झुलस गए थे। तब से उन्हें चलने में दिक्कत होती है साथ ही काफी देर तक वह खड़े नहीं रह सकते। उनके 10 बीघा जमीन तो है लेकिन उस पर उनसे खेती हो नहीं पाती। ऐसे में घेवर राम की पत्नी दूसरों के खेतों में मजदूरी करती है और उसी से परिवार का खर्च चलता है। उन्होंने बताया कि देराज डॉक्टर बनना चाहता था। उसका सपने को पूरा करना जरूरी था। ऐसे में उसकी पढ़ाई के लिए जमीन पर 4 लाख का कर्ज लिया। इसी तरह और लोगों से भी ब्याज पर पैसे लिए और बच्चे को पढ़ने कोटा भेजा। ताऊ की मौत हुई तभी ठान लिया कि डॉक्टर बनूंगा छात्र देराज ने बताया कि डॉक्टर बनने की तो उसने 14 साल की उम्र में ही ठान ली थी। उसने बताया कि शुरू से गांव में ही रहे है। स्कूल भी गांव में ही हुई है। उसने बताया कि उसके ताऊ को कैंसर था। गांव में कोई अच्छा डॉक्टर था नहीं, अस्पताल था नहीं। इलाज करने के लिए मुख्यालय पर अस्पताल में जाना पड़ता था और काफी पैसे लगते थे। पर उनकी मौत हो गई। बस तभी से ठान लिया था कि डॉक्टर बनना है। मेरे माता पिता भी बीमार रहते है। अब परिवार का पहला डॉक्टर बनूंगा और गांव के लोगों का इलाज करूंगा। अब मेरे गांव में बीमारी से कोई परेशान नहीं रहेगा। मैं न्यूरोसर्जन बनना चाहता हूं। आर्थिक की तंगी से एक साल छोड़ी पढ़ाई देराज ने बताया कि परिवार की आर्थिक तंगी को देखता आया हूं, मेरी मां की मेहनत देखी है। पिता की मेहनत देखी है। एक समय ऐसा भी आया जब 12वीं के बाद एक साल खाली बैठा रहा क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, फीस के पैसे नहीं थे। लेकिन माता पिता ने मुझे हार नहीं मानने दी। फ्री में रहने को हॉस्टल मिला, पढ़ाई में मदद रीवा की रहने वाली प्राची ने भी इस साल नीट क्लियर की है। उसे रीवा सरकारी मेडिकल कॉलेज मिला है। प्राची तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उसने बताया कि पहले उसने एमपी से ही तैयारी की थी लेकिन सिलेक्शन नहीं हुआ। घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है। पिता किसान है। परिवार चल सके इतनी ही कमाई होती है। फिर कोटा में फ्री कोचिंग की जानकारी मिली। एग्जाम दिया तो सिलेक्शन हो गया। कोटा में एलेन कोचिंग ने फ्री में पढ़ाई करवाई, हॉस्टल भी उन्होंने ही फ्री में करवाया और खाना पीना भी फ्री में हुआ। मेरा काम था बस पढ़ाई करना और मैने उस पर फोकस किया। आज मेहनत रंग लाई और कोचिंग की मदद काम आई। उसकी बहन भी इस साल फ्री में कोचिंग कर रही है।


