मप्र में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 1790 मेगावॉट का टारगेट दिया था। लेकिन इसमें से महज 50 मेगावाट पर ही काम हो पाया। इस योजना के तहत लगभग 1 हजार आवेदन आ चुके हैं। एक मेगावाट पर लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च आता है और इस हिसाब से लगभग 4 हजार करोड़ रुपए का निवेश रुका हुआ है। जबकि इन किसानों के आवेदन पर ऊर्जा विकास निगम की तरफ से सेंक्शन लेटर जारी कर दिए गए हैं। लेकिन इनमें से एक भी आवेदन पर पावर परचेज एग्रीमेंट नहीं हो पाया। दरअसल इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी ऊर्जा विकास निगम के पास है, लेकिन बिजली खरीदने का काम ऊर्जा विकास निगम का है। इसके लिए किसानों से पहले आओ–पहले पाओ प्रक्रिया के तहत एग्रीमेंट किया जाता है। इसी के तहत जुलाई में 58 आवेदन, सितंबर में 158 और नवंबर माह में 358 आवेदन आ चुके हैं। इन सभी पर एक हजार मेगावॉट के सेंक्शन लेटर जारी हुए हैं, लेकिन एग्रीमेंट एक का भी नहीं हुआ। जानकारी मिली है कि बीते साल मई 2024 में नए टैरिफ आदेश जारी होने के बाद से एग्रीमेंट नहीं हुआ है। ऊर्जा विकास निगम से जब इसकी जानकारी ली तो पता चला कि ऊर्जा विभाग से बात की जा रही है। इसी बातचीत में मामला अटका है। क्या है योजना और कैसे होता है काम पीएम कुसुम योजना केंद्र सरकार ने शुरू की है। जिसमें 80 फीसदी बैंक लोन देता है और 20 फीसदी राशि बतौर मार्जिन मनी किसान की तरफ से लगाई जाती है। इस योजना में शासन का कोई पैसा खर्च नहीं होता है और न कोई सब्सिडी देनी पड़ती है। बल्कि सरकार को फीडर स्तर पर सस्ती बिजली मिलती है। नियमानुसार सेंक्शन लेटर मिलने के 30 दिन के भीतर किसानों को एग्रीमेंट के लिए सभी दस्तावेज जमा करने होते हैं। वहीं अगले 30 दिन में एग्रीमेंट होना चाहिए। लेकिन लगभग 10 महीने से मामला अटका हुआ है। योजना के लिए प्रदेश में बनाए गए हैं 1343 सब स्टेशन मप्र में कुसुम योजना से जुड़ने वालों की लंबी कतार है। इसके लिए मप्र में 1343 सब स्टेशन बनाए गए हैं। इसमें जो आवेदक इन सब स्टेशन से जुड़ना चाहते हैं, उनके पास 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट क्षमता तक सौर ऊर्जा संयत्र होना चाहिए। इसमें किसानों के साथ किसानों के समूह भी मिलकर आवेदन कर रहे हैं। इसके अलावा जल उपभोक्ता संघ, ग्राम पंचायत, कृषि से जुड़ा कोई संस्थान या जो निवेशक हो, वो कर सकता है। योजना से जुड़ने का मुख्य कारण है कि इसमें 25 साल तक के लिए पॉवर परचेज एग्रीमेंट किया जाता है। इसमें ऐसे किसान या समूहों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनकी कृषि भूमि कम उपजाऊ और बंजर है। लेकिन यह सब स्टेशन के 5 किमी दायरे में आना चाहिए। ऊर्जा विभाग से चर्चा जारी
हां , यह बात सही है कि आवेदन आए हैं और अभी पावर परचेजिंग एग्रीमेंट होना है। इस मामले में हमारी ऊर्जा विभाग से बात चल रही है।
मनु श्रीवास्तव, एसीएस, नवीकरणीय ऊर्जा, मप्र शासन


