मऊगंज जनपद शिक्षा केंद्र में पदस्थ विकासखंड स्रोत समन्वयक (बीआरसीसी) शिवकुमार रजक पर एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। उन पर पीएम पोषण योजना के संचालन के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। बुधवार को मऊगंज कलेक्टर को एक ज्ञापन दिया गया, जिसमें बीआरसीसी की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल पद पर भेजने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में बीआरसीसी शिवकुमार रजक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि खुटहा स्कूल में पीएम पोषण योजना के संचालन का आदेश हनुमान स्व सहायता समूह को दिलाने के लिए बीआरसीसी की ओर से लगभग 70 हजार रुपए की रिश्वत ली गई। ज्ञापनकर्ताओं ने दावा किया है कि इस दौरान नोट गिनने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। दबाव बढ़ने पर 6 नवंबर को कथित तौर पर 30 हजार रुपए फोन-पे के जरिए वापस किए जाने का भी उल्लेख है। ज्ञापन सौंपने वालों में विश्वामित्र मुंद्रिका त्रिपाठी और विपिन सिंह शामिल थे। उन्होंने बताया कि बीआरसीसी के खिलाफ पिछले 2-3 वर्षों से भ्रष्टाचार और घूसखोरी की शिकायतें मिल रही हैं। इससे पहले भी विश्वामित्र मुंद्रिका त्रिपाठी, विपिन सिंह और कुंज बिहारी तिवारी सहित आठ लोगों ने भ्रष्टाचार के विरोध में कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अर्धनग्न प्रदर्शन किया था। उस आंदोलन के बाद कलेक्टर के निज सचिव को हटाया गया था। प्रदर्शनकारियों ने उस समय गिरफ्तारी भी दी थी और जेल से रिहा होने के बाद अब उन्होंने बीआरसीसी के खिलाफ अपनी लड़ाई फिर से तेज कर दी है। वे प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


