गुना जिले के बमोरी में एक सरकारी शिक्षक को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले दो अधिकारियों को कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। जिला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा ने तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) राजीव यादव और जनशिक्षक (CAC) छतर सिंह लोधा को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई है। दोनों पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। शिक्षक ने स्कूल के क्लासरूम में ही फांसी लगाकर जान दे दी थी और सुसाइड नोट में इन दोनों अधिकारियों द्वारा पैसों के लिए प्रताड़ित करने का जिक्र किया था। घटना वाले दिन भी धमकाने स्कूल पहुंचा था CAC मामला 18 अप्रैल 2023 का है। सिमरोद पंचायत के गमरिया का डेरा गांव के सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक धर्मेंद्र सोनी (42) ने स्कूल में ही फांसी लगा ली थी। घटना वाले दिन दोपहर में जनशिक्षक (CAC) छतर सिंह लोधा निरीक्षण करने स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक पर नाराजगी जताई और कार्रवाई की चेतावनी दी। दोनों के बीच कहासुनी भी हुई थी। इसके बाद दोपहर 3:30 बजे जब स्कूल में कोई छात्र नहीं था, धर्मेंद्र ने क्लास रूम में फांसी लगा ली। सुसाइड नोट: ‘वेतन में घर चलाऊं या इन्हें घूस दूं?’ पुलिस को शिक्षक के पास से एक सुसाइड नोट मिला था, जो सजा का मुख्य आधार बना। इसमें धर्मेंद्र ने लिखा था- “मुझे BEO और CAC द्वारा इतना प्रताड़ित किया जा रहा है कि मैं आत्महत्या कर रहा हूं। स्कूल बंद होने की धमकी देकर ये लोग मुझसे कभी 1 हजार, कभी 2.5 हजार तो कभी 5 हजार रुपए मांगते हैं। मेरे पास बूढ़े माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। इतने कम वेतन में मैं घर चलाऊं, बच्चों को पालूं या इनकी घूस पूरी करूं? प्रशासन से विनती है कि मुझे मजबूर करने वालों को छोड़ा न जाए।” जांच में दोषी पाए गए, अब जेल भेजा सुसाइड नोट मिलने के बाद पुलिस ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ उकसाने का मामला दर्ज किया था। प्रशासन ने घटना के बाद ही बीईओ राजीव यादव और सीएसी छतर सिंह को सस्पेंड कर दिया था। पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट ने गवाहों और सुसाइड नोट को अहम सबूत मानते हुए दोनों को दोषी करार दिया और सात-सात साल की सजा सुनाकर जेल भेज दिया।


