लुधियाना| पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के विद्यार्थी भवन में विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें रंगमंच की बारीकियों, इसके वैश्विक प्रभाव और तकनीकी विकास पर चर्चा हुई। यूनिवर्सिटी के निदेशक डॉ. निर्मल जौड़ा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पंजाबी रंगमंच आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और आधुनिक तकनीकों के कारण अन्य भाषाओं के रंगमंच के बराबर खड़ा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संचार विभाग के अपर निदेशक और वरिष्ठ संचार विशेषज्ञ डॉ. तेजिंदर सिंह रियाड़ थे, जिन्होंने रंगमंच की अहमियत पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय स्तर के रंगकर्मी डॉ. विशाल बैक्टर ने रंगमंच की तकनीकी और कलात्मक विशेषताओं को विस्तार से समझाया। एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रुपिंदर कौर ने बताया कि पीएयू का साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल हमेशा समृद्ध रहा है और यहां के स्टूडेंट्स विज्ञान की पढ़ाई के बावजूद नाटक और रंगमंच में शीर्ष स्थान हासिल करते आए हैं। कार्यक्रम के विचार-विमर्श सत्र में एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. कुलदीप सिंह और डॉ. करणवीर सिंह गिल ने भी भाग लिया। इस अवसर पर हरमनदीप सिंह, रिखी, दिलावर सिंह, दिव्यांश वर्मा, नवप्रीत कौर, अवनीत कौर, प्रतीक शर्मा और अर्शदीप सहित कई छात्रों ने रंगमंच से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। राष्ट्रीय स्तर के रंगकर्मी डॉ. विशाल बैक्टर ने रंगमंच की तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि उनकी चुप्पी भी बहुत कुछ कह सकती है, बशर्ते वे हाव-भाव को सही तरीके से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि बोले गए शब्द तब और प्रभावी हो जाते हैं, जब उन्हें सही हाव-भाव के साथ प्रस्तुत किया जाए। इस दौरान स्टूडेंट्स ने रंगमंच और नाटकों से जुड़े सवाल भी पूछे।


