भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब अनुसूचित जाति भूमि विकास वित्त निगम के निदेशक रविंदर हंस ने अनुसूचित जातियों का हक मारने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना पंजाब अनुसूचित जाति भूमि विकास और वित्त निगम (पीएससीएफसी) योजना में शेयर पूंजी योगदान केंद्र व राज्य सरकार द्वारा 49:51 के अनुपात में धनराशि जारी की जाती है। अनुसूचित जाति और विकलांग को कम ब्याज दरों पर स्वरोजगार के लिए ऋण वितरित किया जाता है। लेकिन दु:खद है कि केंद्र सरकार ने राज्य अनुसूचित जाति विकास निगमों को दी जाने वाली सहायता योजना को बंद कर दिया है। योजना को बंद करने के कारण पीएफएमएस पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रहा। योजना बंद होने के कारण राज्य सरकार अपना 51% हिस्सा भी निगम को जारी नहीं कर पा रही है। जिस कारण निगम को वित्ती नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निगम प्रत्यक्ष ऋण योजना के तहत शेयर पूंजी निधि का उपयोग लाभार्थियों को स्वरोजगार ऋण वितरित करने के लिए करता है। योजना में लाभार्थियों को ऋण राशि का 95% हिस्सा शेयर पूंजी निधि से दिया जाता है। जबकि शेष 5% का योगदान लाभार्थी द्वारा किया जाता है। योजना के तहत लाभार्थियों को स्व-रोज़गार के लिए 8% की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। निगम अपने प्रशासनिक खर्चों को ऋणों से प्राप्त राशि और ब्याज से पूरा करता था।


