देश में ओबीसी/एससी/एसटी के मेडिकल छात्रों के लिए पीजी में एडमिशन को सुगम बनाने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिशनेशन (एनबीई) ने कटऑफ को रिवाइज्ड कर जीरो परसेंटाइल (माइनस 40 अंक) कर दिया है, वहीं राजस्थान नीट पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड का 18 फरवरी 2026 को जारी आदेश दूसरे राज्यों के ओबीसी और एससी-एसटी छात्रों पर कुठाराघात कर रहा है। संख्या के आधार पर यह 73% मेडिकल पीजी आशार्थियों के साथ अन्याय और तुष्टिकरण है। राजस्थान में बोर्ड ने आदेश जारी किया है कि 103 अंकों से कम अंक लाने वाले दूसरे राज्यों के आरक्षित वर्ग के कैंडीडेट्स स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। जब छात्र इस राउंड में हिस्सा ही नहीं ले सकेंगे तो वे प्रदेश के कॉलेजों में प्रवेश नहीं ले पाएंगे। जबकि अभी भी यहां कई निजी कॉलेजों में सीटें खाली हैं। इसके विपरीत दूसरे राज्यों में ऐसा कोई नियम नहीं है। यही कारण है कि अब प्रवेश लेने के इच्छुक छात्र कह रहे हैं कि एक ही देश में दो नियम लागू हैं। डबल इंजन वाली राजस्थान सरकार अधिकारों पर कुठाराघात कर रही है। दूसरे राज्यों के नियमों से सरोकार नहीं: चेयरमैन ये है आदेश: बोर्ड मेंबर्स ने ओबीसी/एससी/एसटी कैटेगरी में निर्णय लिया है कि स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए दूसरे राज्यों के कैंडिडेट्स जिनका क्वालिफाइंग स्कोर 103 तक है, उन्हें स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा लेने दिया जा जाएगा और जिनका क्वालिफाइंग स्कोर 103 से कम है, वे स्ट्रे वैकेंसी राउंड में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। राजस्थान के रहने वाले लेकिन दूसरे राज्यों से एमबीबीएस पास करने वाले कैंडिडेट्स को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा उनकी कैटेगरी के लिए जारी क्वालिफाइंग स्कोर के हिसाब से हिस्सा लेने दिया जाएगा। राजस्थान नीट पीजी मेडिकल काउंसलिंग बोर्ड के चेयरमैन एसएन शर्मा ने बताया कि हम प्रदेश के लिए निर्णय ले सकते हैं, दूसरे राज्यों में क्या नियम है, इससे हमारा सरोकार नहीं। हमने जो भी निर्णय लिया है वह एएजी से राय लेकर लिया है। अब जो भी होगा, वो कोर्ट में होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अवहेलना: फेडरेशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ऑफ राजस्थान के प्रतिनिधि बोर्ड के इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लंघन करता है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट आदेश दे चुका है कि अगर एडमिशन काउंसलिंग में हिस्सा लेने के आखिरी राउंड तक भी अगर मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह गई हैं तो उन्हें नियमानुसार भर सकते हैं।


