श्योपुर विशेष न्यायालय ने अनुसूचित जाति वर्ग के पीड़ित से मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को छह-छह माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मंगलवार को कोर्ट ने हर आरोपी पर एक-एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। एक मामले में समझौता करने का बनाया दबाव मामले के अनुसार, पीड़ित ने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 25 अगस्त 2022 को शाम करीब 7 बजे वह श्योपुर के नया बस स्टैंड स्थित अपने कार्यालय में बैठे थे। तभी आरोपी अमन वहां आया और खुद को कुलदीप द्वारा भेजा हुआ बताया। जातिसूचक गालियां देकर थप्पड़ मारने का आरोप अमन ने पीड़ित पर एक अन्य मामले में समझौता करने का दबाव डाला। जब पीड़ित ने मना किया, तो अमन ने जातिसूचक गालियां दीं और दो-तीन थप्पड़ मारे। हाथापाई के दौरान अमन ने एक धारदार लोहे का छुरा निकाल लिया, लेकिन पीड़ित के शोर मचाने पर बाहर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया। जाते समय आरोपी ने पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी। आरोपियों को 6 महीने की सजा पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी अमन और कुलदीप के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद, पुलिस ने विशेष न्यायालय श्योपुर में चालान पेश किया। विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र जाधव ने कहा कि न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी पाया। आरोपियों की पहचान अमन उर्फ मोनू पुत्र रविन्द्र भदौरिया, निवासी फौजी का टपरा, ग्राम हीरापुर, और कुलदीप पुत्र मूलचंद जांगिड़, निवासी गैस गोदाम के सामने, सलापुरा, श्योपुर के रूप में हुई है। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 323/109 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(VA) के तहत दोषी ठहराया गया।


