धार जिले के पीथमपुर के ग्राम चंदनखेड़ी में स्थित प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर की शासकीय भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मंदिर के पुजारी द्वारा दस्तावेजों में हेराफेरी कर लगभग 20 बीघा शासकीय भूमि को निजी नामों में दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण धार जिला पंचायत जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर के नाम एसडीएम राहुल गुप्ता को एक आवेदन सौंपा और निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, चंदनखेड़ी स्थित राधा-कृष्ण मंदिर की भूमि शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है और इसका प्रबंधन जिला कलेक्टर के अधीन आता है। यह मंदिर गांव की सार्वजनिक आस्था का केंद्र है, न कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति। इसके बावजूद, 6 नवंबर 2025 को पीथमपुर तहसीलदार द्वारा एक आदेश जारी किया गया। इस आदेश में कलेक्टर का नाम हटाकर मंदिर और उससे जुड़ी शासकीय भूमि को कैलाश शर्मा एवं जगदीश शर्मा के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। ग्रामीण रामस्वरूप रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जगदीश शर्मा एवं कैलाश शर्मा ने आपसी मिलीभगत कर तहसील में आवेदन प्रस्तुत किया और शासकीय भूमि को अपने नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करवाई। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर वर्षों से गांव का सामूहिक अधिकार रहा है और इसका उपयोग मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज होती है, तो इससे गांव की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने पूरे नामांतरण प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच, तहसीलदार के आदेश को तत्काल निरस्त करने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।


