पीथमपुर सेक्टर-7:स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप में निजी जमीन लेना चुनौती बन रहा, सरकारी पूरी तो निजी 57% ही मिल पाई

पीथमपुर सेक्टर-7 में उद्योग विभाग द्वारा विकसित की जा रही स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप में मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआईडीसी) के लिए अभी भी निजी जमीनें लेना चुनौती है। विभाग यहां इंटीग्रेटेड औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्र विकसित कर रहा है, जहां उद्योगों के साथ सुव्यवस्थित रेजिडेंशियल जोन भी उपलब्ध होगा। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण की लागत 452 करोड़ रुपए है। दिसंबर 2026 तक इसे पूरा करना है। जमीन अधिग्रहण की बात करें तो अब तक 57 प्रतिशत निजी जमीन की सहमति या रजिस्ट्री का काम पूरा हुआ है। विभाग का कहना है, आवंटन योग्य 100 प्रतिशत निजी जमीन हमें मिल चुकी है। प्रोजेक्ट के मुताबिक यहां कुल जमीन (नेट प्लानिंग एरिया) 1991 हेक्टेयर है। इसमें निजी जमीन 1252 हेक्टेयर और सरकारी जमीन 590 हेक्टेयर है। इसके अलावा 149 हेक्टेयर वन भूमि भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। भास्कर इनसाइट 19 इकाइयों को जमीन आवंटित हो चुकी एमपीआईडीसी कुल 19 इकाइयों को 256.85 हेक्टेयर जमीन आवंटित कर चुका है। इन 19 कंपनियों द्वारा 9228.09 करोड़ का निवेश एवं 8455 रोजगार प्रस्तावित है। इनमें एशियन पेंट्स, जेएसडब्ल्यू पेंट्स, शक्ति पंप, पिनेकल मोबिलिटी, सन फार्मा जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। परियोजना में साल 2023 तक भूमि समर्पित करने वाले 181 भूस्वामियों को 3615 आवासीय एवं 120 वाणिज्यिक कुल 3735 विकसित प्लॉट (जिनका कुल मूल्य 453.64 करोड़ है) दिए जा चुके है। अतिक्रमण की समस्या भी लगातार बन रही विभाग के सामने यहां अपनी ही जमीन बचाने की चुनौती भी है। यहां पहले भी कई लोगों ने बाले-बाले ही कॉलोनियां काट दी थीं। जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें अभी भी आ रही हैं, वहीं कुछ जमीनों पर ग्रामीणों द्वारा खेती की जा रही है। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन्हें चिह्नित कर लिया है। एक नए उपनगर का रूप ले लेगा स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप प्रोजेक्ट में औ‌द्योगिक, आवासीय, व्यावसायिक एवं लॉजिस्टिक तथा पीएसपी (ṁसार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक) प्लॉटों का विकास किया जाएगा। कुल 1991 हेक्टेयर में से 677 हेक्टेयर जमीन पर आवासीय क्षेत्र का विकास किया जाना है, जो कि अपने आप में एक नए उपनगर का रूप ले लेगा। यह आवासीय क्षेत्र कर्मचारियों को आधुनिक जीवन शैली प्रदान करेगा। इससे इंदौर, महू, राऊ, पीथमपुर, बेटमा, धार आदि से रहवासी दबाव कम होगा तथा कर्मचारियों को कार्य स्थल के समीप निवास स्थान उपलब्ध हो सकेगा। विभाग का दावा है कि जमीन मालिकों को गाइड लाइन का दोगुना मुआवजा नकद अथवा 20-80 पद्धति अनुसार 20 प्रतिशत नकद मुआवजा एवं 80 प्रतिशत के समकक्ष विकसित प्लॉट दिए जा रहे हैं।

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