पीबीएम हॉस्पिटल:निशुल्क मिलने वाली 1825 में से 625 तरह की दवाएं नहीं मंगाता प्रशासन, बाड़मेर से मंगवाए 18 हजार फ्ल्यूइड

पीबीएम हास्पिटल में राेज करीब छह हजार से अधिक मरीज विभिन्न विभागाें के आउटडाेर में आते हैं। 1500 से 2000 भर्ती किए जाते हैं, लेकिन उन्हें पूरी दवाएं नहीं मिल पातीं। डाॅक्टर की पर्ची में लिखी दवाओं में से एक या दाे दवा बाजार से ही खरीदनी पड़ती है। मरीजाें के लिए राहत की खबर ये है कि पंद्रह दिन से शाॅर्ट चल रही दवाओं की खेप पहुंच गई है। गुरुवार काे ड्रग वेयर हाउस से सभी वार्ड और डीडीसी पर दवाएं भेज दी गईं। पीबीएम हाॅस्पिटल में मरीजाें के लिए फ्लूइड खत्म हाे गया था। गुरुवार काे बाड़मेर से एनएस और आरएल की 18 हजार बाेतल मंगवाई गई। हालांकि ड्रग वेयर हाउस में फ्लूइड की 1.50 लाख बाेतल रखी हुई हैं, लेकिन क्वालिटी चेक नहीं हाेने से 15 दिन से सप्लाई नहीं हाे पा रही। इसमें अभी और समय लग सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने बाड़मेर में स्टाॅक अधिक हाेने के कारण वहां से मंगवा ली। इसी प्रकार एंटीबायोटिक एजीथ्रोमाइसिन की 2.70 लाख टेबलेट और कैल्शियम कार्बाेनेट प्लस विटामिन डी की छह लाख टेबलेट भी क्वालिटी चेक के बाद रिलीज कर दी गई है। पीबीएम परिसर स्थित 36 जिला दवा वितरण केंद्राें पर दवाओं की सप्लाई डिमांड के अनुसार भेजी गई है। कड़ाके की ठंड के कारण इन दिनाें सर्दी, जुकाम, बुखार, अस्थमा के मरीज अधिक आने से यह दवाएं सप्ताह भर में ही खत्म हाे जाती हैं। दवाएं पूरी नहीं मिलने से मरीजाें काे परेशान हाेना पड़ रहा था। उन्हें दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही थी। कुछ दिन पहले भी ऐसे ही हालात पैदा हाे गए थे। ईएनटी हाॅस्पिटल स्थित डीडीसी पर मरीजाें काे दवाएं नहीं मिलने से काफी परेशानी उठानी पड़ी। भास्कर ने इस समस्या काे प्राथमिकता से उठाया था। उसके बाद ड्रग वेयर हाउस में दवाएं वितरण के लिए रिलीज हाे पाई। 1200 दवाएं ही मंगाता है प्रशासन दरअसल राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालाें में 1825 दवाओं के निशुल्क वितरण की व्यवस्था कर रखी है। पीबीएम हाॅस्पिटल के ड्रग वेयर हाउस में करीब 1200 तरह की दवाएं ही आती हैं। 625 तरह की दवाएं नहीं मंगवाई जाती। इसके पीछे प्रशासन का तर्क है कि अधिकांश दवाएं काम नहीं आती। कुछ इतनी महंगी है कि जरूरत पड़ने पर ही मंगवाई जाती है। क्याेंकि उनकी एक्सपायरी डेट कम हाेती है। कैंसर की महंगी दवाएं भी मंगवाई कैंसर के मरीजाें के काम आने वाली ओसिमर्टिनिब काइनेज इनहिबिटर टेबलेट भी मंगवा ली गई है। इसकी एक महीने की डाेज तीन लाख रुपए की है। इसी प्रकार हेड एंड नेक और ब्लेडर कैंसर में काम आने वाले इंजेक्‍शन भी सप्लाई में उपलब्ध हैं। बाजार में इनकी कीमत एक-एक लाख रुपए है। इन महंगी दवाओं के नहीं मिलने से मरीजाें काे काफी परेशानी हाे रही थी। “पीबीएम के ड्रग वेयर हाउस में अब दवाओं की कमी नहीं है। सभी 1200 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। जाे दवाएं कम थीं वे मंगवा ली गई हैं। जयपुर में प्रत्येक दवा की लैब में क्वालिटी चैक हाेती है, जिसमें 21 दिन से एक महीने का समय लगता है। इस बीच काेई दवा खत्म हाेती है ताे दूसरे जिलाें से मंगवा ली जाती हैं।” -डाॅ. शिव शंकर झंवर, नाेडल प्रभारी, ड्रग वेयर हाउस

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