भास्कर न्यूज |गिरिडीह जिले भर में बड़े पैमाने पर पुदीना की खेती की जाती है, लेकिन इसमें लगने वाले विभिन्न रोग किसानों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। पुदीना की फसल में मुख्य रूप से रतुआ रोग, पर्ण धब्बा रोग, जड़ गलन (सड़न) रोग तथा चूर्णिल आसिता जैसी बीमारियां देखी जा रही हैं, जो सीधे तौर पर उत्पादन को प्रभावित करती हैं। कृषि वैज्ञानिक मधुकर कुमार ने बताया कि पुदीना रतुआ रोग में पत्तियों और तनों पर नारंगी रंग के फफोले बनते हैं, जो बाद में काले हो जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिए रोग दिखाई देने पर डाइथेन एम-45 (0.2 प्रतिशत) का छिड़काव करना चाहिए तथा फसल चक्र (फसल परिवर्तन) अपनाना लाभकारी होता है। पर्ण धब्बा रोग में पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे बनते हैं और पत्तियां पीली होकर झड़ने लगती हैं। इसके उपचार के िलए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (0.3 प्रतिशत) का छिड़काव प्रभावी है। वहीं जड़ गलन या सड़न रोग में जड़ें काली या गुलाबी होकर सड़ जाती हैं, जिससे पूरा पौधा सूख जाता है। इससे बचाव के लिए रोपण से पहले स्टोलन (जड़ भाग) को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या बेनलेट (0.1 प्रतिशत) से उपचारित करना चाहिए। चूर्णिल आसिता रोग में पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसी परत दिखाई देती है। इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक या कैराथन (25 प्रतिशत) का छिड़काव किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी कि खेत में उचित जल निकासी रखें, जलभराव से बचें तथा संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से निकालकर नष्ट करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथालिन का प्रयोग लाभकारी है। कीट नियंत्रण के िलए पत्ती लपेटक कीट के लिए क्विनालफॉस या मैलाथियान 50 ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।गर्मियों में पौधों को स्वस्थ रखने के लिए नीम तेल या हल्के साबुन मिश्रित पानी का छिड़काव किया जा सकता है। समय पर रोग प्रबंधन से पुदीना की फसल में बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है। कृषि वैज्ञानिक मधुकर कुमार आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 7 004690495 पर सिर्फ मैसेज करें।


