प्रतापगढ़ जिले में पुलिसकर्मियों पर ग्रामीणों के साथ मारपीट और गाली-गलौज के आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने मिनी सचिवालय में प्रदर्शन किया। कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया को ज्ञापन सौंपकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीण जीवराज मीणा ने बताया कि 26 दिसंबर की सुबह 11 बजे वह और गांव के अन्य निवासी, मोहन मीणा, सत्यनारायण सहित नौ लोग भैंरु बावजी के स्थान पर पूजा-पाठ के बाद अलाव ताप रहे थे। इसी दौरान धमोतर थाने और बारावरदा चौकी के पुलिसकर्मी, जिनमें भंवर सिंह और प्रेमचंद शामिल थे, वहां पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और बिना किसी कारण मारपीट करने लगे। ग्रामीणों के अनुसार जब मारपीट का कारण पूछा गया तो पुलिसकर्मी कहने लगे, “सभी को थाने ले चलो।” इसके बाद उन्हें जबरन जीप और बाइक पर बैठाकर थाने ले जाया गया। वहां उन्हें मारपीट कर हवालात में बंद कर दिया गया। आरोप है कि रात में शराब के नशे में सात-आठ पुलिसकर्मियों ने फिर से उनके साथ मारपीट की और धमकी दी कि यदि किसी से शिकायत की तो जान से मार देंगे। घटना के बाद भयभीत ग्रामीणों ने पहले शिकायत दर्ज नहीं करवाई। लेकिन जब गांव के सरपंच और अन्य लोगों को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर मिनी सचिवालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से न्याय की मांग की है। कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने ज्ञापन लेकर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


