शहर के देबारी इलाके में चलती कार में महिला से गैंगरेप के मामले में तीन दिन बाद नया मोड़ आ गया। पुलिस ने मामले को झूठा करार देते हुए दावा किया कि पीड़िता के बयानों और तथ्यों को जांचने के बाद ऐसा ही साबित हो रहा है। डीएसपी छगन पुरोहित ने बताया कि टीम ने तीन दिन तक प्रतापनगर चौराहे और आसपास में लगे सीसीटीवी को खंगाला। इसमें घटना वाले दिन न तो महिला ही दिख रही है, न ही ऐसी कोई कार, जिसमें वह सवार होती नजर आ रही है। पीड़िता खुद गैंगरेप होने से मुकर गई है। अब उसने घरेलू मारपीट होना बताया है। महिला ने शराब पिए होने की बात भी स्वीकारी है। पुलिस जांच के इतर खास बात यह है कि मेडिकल कारणों के चलते महिला की मेडिकल रिपोर्ट में भी दुष्कर्म होने का तथ्य सामने नहीं आ सकता है और इसी कारण आया भी नहीं। यह था मामला 40 वर्षीय महिला ने प्रतापनगर थाने में 12 फरवरी को रिपोर्ट दी थी कि वह 11 फरवरी को रात 9 बजे प्रतापनगर चौराहे पर घर लौटने के लिए साधन का इंतजार कर रही थी। इस बीच, एक कार में लिफ्ट ली। चार युवक उसमें पहले से थे। आरोपियों ने उसके घर के पास देबारी टी-प्वाइंट पर कार नहीं रोकी और चलती कार में गैंगरेप किया। फिर डबोक ले जाकर सरिये से मारपीट की। इसके बाद गीतांजली कॉलेज के पास फेंक गए। होश में आने के बाद होटल राइजिंग पहुंची और गार्ड को घटना बताई। ये सवाल पैदा कर रहे दावे पर संदेह प्रशिक्षु आईपीएस को क्यों हटाया?
गैंगरेप सामने आने के बाद 12 फरवरी को आईजी ने प्रतापनगर थाने में बतौर इंचार्ज तैनात आईपीएस प्रशिक्षु माधव उपाध्याय का गोगुंदा थाने में ट्रांसफर कर दिया। उन्हें एसपी ने यहां 10 फरवरी से 3 मई तक तैनात किया था।


