दतिया की विशेष अदालत ने पुलिस बल पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग करने के मामले में आरोपी बंटी कुशवाह को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 15 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने इस चर्चित मामले में आरोपी को हत्या के प्रयास, अवैध हथियार रखने और डकैती-व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम के तहत दोषी पाया है। सरकारी वकील राजेश पस्तोर के मुताबिक, घटना 12 जून 2024 की है। इंदरगढ़ थाना प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फरार आरोपी बंटी कुशवाह अपने नाबालिग साथी के साथ बिना नंबर की मोटरसाइकिल से ग्वालियर की ओर से रतनगढ़ माता मंदिर की तरफ आ रहा है। सूचना के आधार पर एसडीओपी सेवढ़ा और इंदरगढ़ थाना प्रभारी ने पुलिस बल के साथ बताए गए स्थान पर घेराबंदी की। पैर में गोली लगी तो कर दिया सरेंडर जब दोनों आरोपियों को रोका गया तो उन्होंने कट्टों से पुलिस बल पर फायरिंग कर दी और रतनगढ़ माता मंदिर की ओर भागने लगे। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में एक गोली आरोपी के पैर में लगी, जिससे वह गिर पड़ा। इसके बाद बंटी कुशवाह ने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग साथी का केस बाल न्यायालय में मामले की जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया गया। अंतिम बहस के बाद न्यायालय ने बंटी कुशवाह को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा और अर्थदंड से दंडित किया। इस प्रकरण में दूसरा आरोपी नाबालिग होने के कारण उसका मामला बाल न्यायालय में विचाराधीन है।


