राजसमंद जिले में महिलाओं को सशक्त बनाने और जेंडर आधारित हिंसा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नई चेतना 4.0 पहल – बदलाव की राष्ट्रीय जेंडर अभियान के तहत सुरक्षा सखियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस लाइन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सुरक्षा सखियों को जेंडर आधारित हिंसा के विरुद्ध जागरूकता, साइबर सुरक्षा और आत्मरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कलेक्टर और एसपी के निर्देशन में हुआ आयोजन कार्यक्रम का आयोजन जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा एवं पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला परिषद की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं जिला परियोजना प्रबंधक राजीविका डॉ. सुमन अजमेरा द्वारा किया गया। सशक्त महिला से सशक्त समाज का निर्माण कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त व आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सशक्त महिला से ही सशक्त परिवार और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना और महिला-पुरुष के बीच व्याप्त भेदभाव को कम करना है। सुरक्षा सखियां निभाती हैं सेतु की भूमिका: एसपी पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षा सखियां समाज और पुलिस के बीच सेतु का कार्य करती हैं। उनका दायित्व है कि प्रत्येक पीड़ित एवं जरूरतमंद महिला को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पुलिस से समन्वय स्थापित करें। उन्होंने बेटियों को शिक्षित व जागरूक रहने, मोबाइल फोन के सीमित और सदुपयोग तथा साइबर अपराधों से सतर्क रहने का संदेश दिया। साइबर सुरक्षा और आत्मरक्षा पर दिया गया प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा साइबर अपराधों के नए तरीकों, उनसे बचाव और आत्मरक्षा के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई। महिलाओं को यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की जेंडर आधारित हिंसा की स्थिति में किस तरह त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में दिलाई गई जेंडर प्रतिज्ञा कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं को जेंडर समानता और हिंसा के विरुद्ध जागरूकता की प्रतिज्ञा दिलाई गई। आयोजकों ने विश्वास जताया कि सुरक्षा सखियां अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं को जागरूक कर एक सुरक्षित और संवेदनशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


