भास्कर न्यूज | बालोद बुधवार को विश्व पुस्तक दिवस पर शहीद दुर्वासा निषाद शासकीय कॉलेज अर्जुन्दा में ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक कार्यक्रम हुआ। आयोजन ग्रंथालय विभाग की ओर से किया गया। उद्देश्य था विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देना और पुस्तकों के महत्व को समझाना। मुख्य वक्ता रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अरुणा साव ने कहा कि पुस्तकें मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। ये केवल ज्ञान का भंडार नहीं, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन देने वाली सच्ची साथी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे पठन को केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आत्मविकास का साधन बनाएं। कार्यक्रम की शुरुआत ग्रंथालय प्रमुख अनिल नागवंशी के स्वागत वक्तव्य से हुई। उन्होंने कहा कि ग्रंथालय केवल किताबों का संग्रहालय नहीं, बल्कि विचार और संस्कृति का केंद्र होता है। सूचनाओं की भीड़ में विवेक पुस्तकों से आता है: समीर प्रभारी प्राचार्य डॉ. समीर दसपुत्रे ने विश्व पुस्तक दिवस 2025 की थीम पुस्तकों से जुड़ो, खुद को जानो पर विस्तार से बात की। इस थीम का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार पढ़े और पुस्तकों के माध्यम से खुद को सशक्त बनाए। उन्होंने कहा कि आज के समय में सूचनाओं की भरमार है, लेकिन पुस्तकों से मिलने वाला ज्ञान ही विवेक और स्थायित्व देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी उपकरणों से दूरी बनाकर पुस्तकों से मित्रता करने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन अतिथि व्याख्याता विकास साहू ने किया। उन्होंने साहित्यिक शैली में विषय को प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस अवसर पर अन्य विद्यार्थियों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने पुस्तकों की विशेषता बताई। अपनी पसंद की किताबें चुन अपने तरीके से पढ़ें बालोद| नवीन शासकीय कॉलेज जेवरतला में भी विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और साहित्य के महत्व को समझाना है। अपने तरीके से पढ़ें थीम का फोकस बच्चों को अपनी पसंद की किताबें चुनने की आज़ादी देना और पढ़ने को आनंद से जोड़ना रहा। प्राचार्य डॉ. यासर कुरैशी ने कहा कि विश्व पुस्तक दिवस 1995 से मनाया जा रहा है। यह दिन उन महान लेखकों की स्मृति में भी मनाया जाता है जिनकी मृत्यु 23 अप्रैल को हुई थी। इनमें विलियम शेक्सपियर, मेगुएल डे सर्वेंटस और इंका गार्सिलासो डे ला वेगा शामिल हैं। यह दिन साहित्य के महत्व को समझने और पढ़ने की रुचि को बढ़ाने का अवसर देता है। कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक नरहरि सिंह, सभी अतिथि व्याख्याता व छात्र- छात्राओं सहित अन्य शामिल हुए।


