मंगलवार सुबह पूरा अलवर शहर कोहरे से अट गया। बादलों की तरह कोहरा शहर के ऊपर रुक गया। जो बाला किला की पहाड़ियों से खूबसूरत नजारे के रूप में दिखा। केवल बाला किला की पहाड़ियों की चोटी पर धूप रही और पूरा अलवर कोहरे से अटा रहा। साल में ऐसा अवसर दो-चार बार आता है। जब बाला किला से अलवर की पहाड़ियों की चोटी पर धूप होती है और उसके नीचे कोहरा। मोना बादलों ने अलवर को दबा लिया हो। यह देखने के काफी टूरिस्ट सुबह-सुबह बाला किला पहुंच गए। सोमवार को दिन भर कोहरा रहा, शाम से घना अलवर में सोमवार शाम तक कोहरे का असर रहा। लेकिन देर शाम होते घना कोहरा छा गया। रात को ही विजिबिलिटी 30 मीटर के आसपास रह गई। मंगलवार सुबह भी 9 बजे तक विजिबिलिटी 30 मीटर के आसपास ही थी। पूरी रात घना कोहरा रहा। अलवर शहर में भी कुछ हिंस्सों में कोहरे का असर अधिक तो कहीं कम रहा। अलवर शहर व जिलें में घना कोहरा छाया हुआ है। विजिबिलिटी मुश्किल से 50 मीटर से भी कम बनी हुई है। बनी हुई है।ऐसे में वाहन चालकों को घने कोहरे में चलना मुश्किल हो रहा है अलवर का न्यूनतम तापमान भी 5 डिग्री बना हुआ है जिससे गलन और ज्यादा हो गई है और लगातार ठिठुरन बनी हुई है।फसलों पर ओस भी जमी हुई और पानी टपक रहा है।कई सुखी लकड़ियो पर हल्की ओस जमी हुई नजर आई है ग्रामीण इलाकों में लोग अलाव सेक कर सर्दी से राहत पा रहे है ओस की महीन बूंदे गिरती रही अलवर शहर में सुबह के समय टेलको चौराहे, तूलेड़ा, राठ नगर, बहरोड़ रोड, चिकानी के आसपास घने कोहरे के साथ हल्की ठंडी हवा का असर रहा। वहीं महीने ओस की बूंदे भी गिरी। दो दिन से दिन में सर्दी चरम पर है। हालांकि यह मौसम फसल के लिए फायदेमंद है। आगे लगातार गलन रहने से फसल में नुकसान होने का डर रहता है। लेकिन इस बार सर्दी का असर फीका रहा है। अभी कड़ाके की सर्दी पड़ने लगी है। जिससे फसलों को फायदा है।


