भास्कर न्यूज | गढ़वा संस्कार भारती के प्रांत मंत्री सह पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच गढ़वा के निदेशक नीरज श्रीधर “स्वर्गीय” ने कहा कि चैत्र माह में वृक्षों में नए पत्ते व पुष्प निकल आते हैं। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति स्वयं ही नववर्ष मना रही हो। किंतु जनवरी में प्रकृति के अंतर्गत ऐसा कोई परिवर्तन नहीं होता। चैत्र माह में नए मौसम का आगमन होता है और पुराना ठंड का मौसम समाप्त होता है। किंतु जनवरी के समय ऐसा कोई परिवर्तन नहीं होता। जैसा दिसंबर वैसा ही जनवरी। भारतीय पंचांग पांच अंगों के मेल से बना है तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण। इन्हीं पांचों की स्थिति पर हमारे शुभ कार्य तय होते हैं। चैत्र माह में में शुभ कार्यों के लिए नया योग बनता है। मगर जनवरी में कोई भी शुभ कार्य के लिए योग नहीं बनता। यह समय खरमास का होता है। प्राचीनता के आधार पर भारतीय पंचांग सबसे पुराना है। इसी को देखकर यूनानियों ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में पंचांग का चलन प्रारंभ किया था। भारतीय पंचांग के माध्यम से ही 12 महीने का एक वर्ष और सात दिनों का एक सप्ताह तय किया गया है। हमारा पंचांग ग्रह-नक्षत्र की दिशा के आधार पर तय होता है। इसके द्वारा बताया गया नववर्ष किसी धर्म विशेष का नहीं अपितु संपूर्ण भारतवर्ष का है। अंग्रेजी कैलैण्डर चलन में होने के कारण मात्र तिथि याद रखने के लिए उपयुक्त जान पड़ता है। अन्यथा सभी कार्य तो भारतीय पंचांग के आधार पर ही होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग के माध्यम से ही 12 महीने का एक वर्ष तथा सात दिनों का एक सप्ताह तय किया गया है। हमारा पंचांग ग्रह-नक्षत्र की दिशा के आधार पर तय होता है। भारतीय नववर्ष के शुभागमन पर परस्पर शुभकामना संदेश तो भेजें ही साथ ही साथ अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर, राज्य और पूरे राष्ट्र को सुंदर तरीके से सुसज्जित करते हुए हर्ष और उल्लास के साथ नववर्ष का यह उत्सव मनाएं।


